मैनपुरी। जुलाई का दूसरा सप्ताह शुरू हो गया है, अब मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है। लेकिन अब तक जल संरक्षण के लिए तालाब तैयार नहीं हो सके हैं। गांव-गांव खोदे जा रहे नए तालाब और पुराने की तालाबों की सफाई का काम भी अब तक पूरा नहीं हो सका। महज 18 तालाब ही वर्तमान में खोदाई कार्य पूर्ण होने के बाद वर्षा का जल संचय करने के लिए तैयार हैं। अगर जल्द बारिश शुरू हो जाती है तो अन्य तालाबों की खोदाई का काम भी रुक जाएगा।
जिले की ग्राम पंचायतों में दो हजार से अधिक छोटे बढ़े तालाब हैं। इन तालाबों में से हर साल कुछ तालाबों का चिह्नांकन कर उनकी खोदाई और सफाई का कार्य कराया जाता है। साथ ही ग्रामसभा की भूमि पर प्रस्ताव के अनुसार नए तालाबों की खोदाई भी कराई जाती है। इस पर मनरेगा योजना के तहत धनराशि खर्च की जाती है। इस साल भी जल संरक्षण और श्रमिकों को रोजगार देने के उद्देश्य से 127 तालाबों की खोदाई और सफाई का लक्ष्य रखा गया था। इसमें 67 नए तालाबों की खोदाई और 60 पुराने तालाबों की सफाई कराई जानी थी। मानसून सक्रिय होने से पहले ये कार्य पूरा करना है।
लेकिन मानसून सिर पर होने के बावजूद केवल 18 तालाबों की ही सफाई का कार्य पूरा हो सका। 67 नए तालाबों की खोदाई का कार्य और 42 पुराने तालाबों की सफाई का कार्य चल रहा है। ऐसे में अगर बारिश होती है तो बारिश के पानी का संचय तो दूर उल्टा खोदाई का कार्य भी रुक जाएगा। लेकिन जिम्मेदार खंड विकास अधिकारियों को इसकी कोई चिंता नहीं है।