ताजमहल के अंदर बंदरों के आतंक की शिकायत इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मई में की थी, जिसके बाद पर्यटन महानिदेशक अवनीश कुमार अवस्थी ने कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखकर कुत्तों और बंदरों के आतंक से पर्यटकों को निजात दिलाने के लिए कहा था।
तीन महीने बाद भी बंदरों को पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि फ्रांस और आस्ट्रिया की पर्यटकों को बंदर काट चुके हैं। आईटो ने ताजमहल के साथ आगरा किला में भी बंदरों के आतंक और इन पर कार्रवाई की मांग की है।
10 हजार बंदर पकड़ने का नया प्रोजेक्ट
वाइल्ड लाइफ एसओएस को शहर में 10 हजार बंदर पकड़ने का प्रोजेक्ट एडीए ने दिया है। इसे अभी प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति मिलना बाकी है। हर बंदर को पकड़ कर स्टरलाइज करने, वैक्सीन देने के बाद उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा, जहां से उसे पकड़ा है।
वाइल्ड लाइफ एसओएस के डॉ. बैजूराज ने बताया कि अनुमति मिलते ही बंदरों को पकड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे पहले पूर्व कमिश्नर प्रदीप भटनागर की पहल पर वाइल्ड लाइफ एसओएस को बंदर पकड़ने और हॉस्पिटल बनाने के लिए 1.8 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। चुरमुरा में एसओएस ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हास्पिटल खोलकर यहां बंदरों के वैक्सीनेशन, स्टरलाइजेशन की व्यवस्थाएं की हैं।