आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में 11 साल की बालिका से छेड़छाड़ के मामले को दबाने का आरोप कॉलेज प्रशासन पर लग रहा है। परिजन का आरोप है कि प्रलोभन और दबाव को दरकिनार कर समझौते से मना करने पर झूठी कहानी गढ़ दी गई है। कॉलेज प्रशासन ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) को गर्मी, कूलर की हवा न मिलने पर रेजिडेंट डॉक्टर से झगड़ा होने के बाद आरोप लगाने की रिपोर्ट भेजी है। जबकि ऐसा कोई विवाद हुआ ही नहीं।
मंगलवार की रात बाल रोग विभाग के वार्ड में भर्ती बालिका के परिजन ने रेजिडेंट डॉक्टर दिलशाद हुसैन पर जांच के बहाने चैंबर में बालिका के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। परिजन का यह भी आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने नौकरी देने, विभागीय कार्रवाई करने समेत अन्य प्रलोभन देकर समझौते का दबाव बनाया। वारदात के अगले दिन दोपहर तक यही होता रहा।
परिजनों का कहना है कि जब साफ तौर पर उन लोगों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की ठान ली तो कॉलेज प्रशासन ने झूठी रिपोर्ट तैयार की और शासन को भेज दी।
कॉलेज प्रशासन की भेजी यह रिपोर्ट
डीजीएमई को भेजी रिपोर्ट में कुछ यूं जिक्र है कि 10 सितंबर की मध्य रात को रेजिडेंट डॉक्टरों और मरीज के तीमारदारों के बीच मरीज को न देखे जाने एवं वार्ड में गर्मी एवं कूलर की हवा को लेकर झगड़ा हुआ। तीमारदारों ने ड्यूटी डॉक्टर से कहा कि आज शाम बच्ची को ठीक से चेक नहीं किया है। इसके बाद बच्ची अपनी मां के साथ जूनियर रेजिडेंट प्रथम वर्ष डॉ. दिलशाद के पास चेकअप कराने गई। इसके कुछ समय बाद मरीज के तीमारदारों ने पुलिस को फोन पर शिकायत कर बुला लिया। आरोप लगाया कि ड्यूटी डाॅक्टर ने बच्ची को गलत तरीके से छुआ। पुलिस आई और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को अपने साथ लेकर चली गई।