मोदी सरकार की योजनाएं मथुरा में अफसरों ने अधर में लटका दी हैं। किसी में बजट की कमी है तो किसी में काम इतना सुस्त है कि दो साल बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। अमृत योजना, स्वच्छता मिशन, हृदय योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना रफ्तार ही नहीं पकड़ पाईं। केंद्र की टीम भी निरीक्षण कर चुकीं। अफसरों को कसा गया लेकिन हालात फिर भी नहीं बदल सके हैं।
11 फरवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वृंदावन में आ रहे हैं। अगर उन्होंने मथुरा में चल रहीं केंद्र की योजनाओं के बारे में पूछ लिया तो मशीनरी की लापरवाही सामने आ जाएगी। मथुरा में किस तरह से रेंग रही हैं योजनाएं वे खुद जान लेंगे। यह स्थिति किसी एक योजना की नहीं बल्कि केंद्र की हर स्कीम का यही हाल है।
अमृत योजना
केंद्र की इस योजना के अंतर्गत शहर के कुछ पार्कों को संवारा जाना था। भगत सिंह पार्क, धौलीप्याऊ प्राइमरी स्कूल पार्क और कृष्णा विहार पार्क में थोड़ा बहुत काम हुआ है, जबकि बाकी जगह के लिए बजट ही नहीं मिला है। किसी पार्क में चार लाख का काम हुआ तो किसी में पंद्रह लाख है। पूरी तरह से एक भी पार्क को पूरा नहीं किया जा सका है।
हृदय योजना
इस योजना के अंतर्गत सौंदर्यीकरण के काम होने थे। 18 करोड़ की इस योजना में वृंदावन के परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण होना था। चार घाटों को संवारा जाना था, श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पोतरा कुंड चौराहे का निर्माण, पार्किंग स्थल का निर्माण और पुलिस बूथ बनना था लेकिन अभी तक कोई भी काम पूरा नहीं हो पाया है। इसी योजना में 9 करोड़ से विश्राम घाट को संवारा जाना था लेकिन अभी तो काम शुरू हो सका है।
स्वच्छता मिशन
इस योजना के अंतर्गत मथुरा को ओडीएफ तक घोषित कर दिया गया लेकिन अभी भी तमाम शौचालय ऐसे हैं जिन पर ताले लगे हैं। मजबूर लोग खुले में शौच जा रहे हैं। जहां शौचालय बना दिए हैं वहां उनके संचालन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। साफ-सफाई के भी कोई खास प्रबंध नहीं हैं। जगह जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
यह योजना 1 अप्रैल 2018 को शुरू हुई थी। 31 दिसंबर 2018 तक इस योजना के अंतर्गत केवल 1596 लोगों को लोन दिया जा सका है, जबकि हजारों लोग लाइन में हैं। सैकड़ों आवेदनों को बैंकों ने रद्द कर दिया है। आज भी बेरोजगार नौजवान ऋण के लिए बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन बैंक वाले कोई न कोई अड़चन बताकर इनकी फाइलों को वापस कर रहे हैं।
जनधन योजना
इस योजना के अंतर्गत साढ़े तीन लाख खाते खोले गए थे। इन खातों में से केवल 10 फीसदी खातों का ही संचालन हो रहा है। बाकी खातों से कोई लेनदेन नहीं हो रहा है। अब पच्चीस हजार खातों को खोलने का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन अब कोई खाता खुलवाने वाला ही नहीं मिल पा रहा है। कई बैंकों ने हाथ ही खड़े कर दिए हैं।
लापरवाह अफसरों पर होगी कार्रवाई: श्रीकांत शर्मा
प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सभी योजनाओं को गंभीरता से साथ लागू कराया जा रहा है। किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी। पिछले दिनों अफसरों की मीटिंग में सभी को निर्देश दिए गए थे कि लटके कामों को तेजी के साथ पूरा किया जाए।