आगरा में सपा नेता शिव कुमार राठौर और दिनेश राठौर की कंपनियों से जो कागजात मिले हैं, उनसे 200 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा हो सकता है। आयकर अधिकारियों के मुताबिक उनकी कंपनियों ने बोगस खरीद और खर्चे दिखाए हैं।
जो लोग सरसों की बिक्री का काम ही नहीं करते, उनसे सरसों की खरीद दिखाई गई है। गरीब किसानों के खातों को खोलकर उनमें 45 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन किए गए हैं। सरसों की जो खरीद दिखाई गई, वह ट्रक उन ई-वे बिलों को लेकर रूट से गुजरे ही नहीं।
इसके अलावा दिनेश राठौर की कंस्ट्रक्शन और रीयल इस्टेट फर्म के जरिए काले धन को सफेद करने संबंधी कागजात सामने आए हैं। इसमें भी झांसी के एक गरीब मजदूर के नाम पर कंपनी बनाकर सब कांट्रेक्ट दिखाए गए हैं।
आयकर अफसर भी रह गए हैरान
आयकर छापों के दौरान फर्जी कंपनियों, फर्जी खरीद-बिक्री और खर्चे दिखाकर 120 करोड़ रुपये का काला धन सफेद करने के कागजात मिले हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनियों के जरिए यह खेल किया गया। कार्रवाई के जो कागजात और तथ्य सामने आए, उससे आयकर के अफसर भी हैरान हैं।
आयकर जांच में जब कंपनियों को तलाशा गया तो पता चला कि झांसी के मजदूर को कंपनी का पार्टनर दिखाया गया है। यही नहीं, मोबिलाइजेशनल एडवांस के नाम पर 114 करोड़ रुपये तो लिए, पर उसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया। एक दो नहीं, बल्कि दर्जन भर से ज्यादा फर्जी कंपनियों के नाम पर टेंडर और सब कांट्रेक्ट का यह खेल खेला गया।
आरपी इन्फ्रावेंचर से मिले कई कागजात
प्रधान आयकर निदेशक अमरेंद्र कुमार के निर्देशन में आयकर छापों के दौरान आरपी इन्फ्रावेंचर के निदेशक संतोष शर्मा के परिसरों की जांच की तो उसमें कई कागजात निकले। आयकर अधिकारियों के मुताबिक संतोष शर्मा ने जांच में काफी सहयोग किया और लिखित बयान भी दर्ज कराए हैं।
उनकी प्रॉपर्टी के कागजात सीज किए गए हैं और दो लॉकर भी सील हुए हैं। संतोष शर्मा ने लिखित बयान में कहा है कि उनकी नई बनी कंपनियों को जो ठेके नहीं मिल सकते थे, वो सलोनी ग्रुप के दिनेश राठौर को डायरेक्टर बनाकर दिलाए गए।
सपा सरकार में सत्ताधारियों से नजदीकी के कारण उन्हें इनर रिंग रोड- फेज 2 का ठेका मिला। 26 जुलाई 2016 को दिनेश राठौर को शेयर होल्डिंग के बिना डायरेक्टर बनाया गया। 27 जुलाई को एडीए ने उनकी फर्म को ठेका दे दिया। 350 करोड़ रुपये के ठेके में किकबैक को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद ही मुख्यमंत्री को शिकायत की गई, जिसकी जांच जारी है।
झांसी का मजदूर निकला पार्टनर
आयकर अधिकारियों ने बताया कि आरपी इन्फ्रा ने ठेके के बाद सब कांट्रेक्ट के लिए दस कंपनियां भी दिखाई, जिनमें एक झांसी का मजदूर भी पार्टनर दिखाया गया है। उसने पूछताछ में बताया कि उससे केवल चेक पर साइन कराए जाते हैं।
उसे किसी कंपनी की जानकारी नहीं, वो मजदूरी करता है। सरन कंस्ट्रक्शन के 19.84 करोड़ के ठेके में भी ऐसी 10 कंपनियों को दिखाया गया। 6 करोड़ का डीजल, 1.5 करोड़ रुपये के खर्च दिखाए गए, लेकिन कागजात नहीं दिए गए। इन कंपनियों के रिटर्न दिखाकर रिफंड भी ले लिए गए।
जसोला ऑफिस में बिछी थी खटिया
आरपी इन्फ्रावेंचर ने दिल्ली के जसोला में रजिस्टर्ड ऑफिस दिखाया है, लेकिन यहां आयकर जांच में कोई ऑफिस नहीं दिखा। यहां खटिया बिछी मिली और चौकीदार यहां आने वाले पत्रों को आगरा भेजता है। संजय प्लेस में कारपोरेट ऑफिस दिखाया गया, लेकिन उस जगह बिल्डिंग निर्माणाधीन है। आफिस में एसी, कर्मचारी, खर्चे दिखाए हैं जो हैं ही नहीं। यह बोगस खर्चे कई कंपनियों के जरिए दिखाए गए।
गजब का निकाला एडवांस का खेल
इनर रिंग रोड का ठेका एचजी इन्फ्रा इंजीनियरिंग को मिला था, लेकिन सब कांट्रेक्ट आरपी इन्फ्रावेंचर को दिया गया। गजब का खेल ये कि काम शुरू करने और तेजी के लिए 2016-17 में 96 करोड़ का मोबिलाइजेशन एडवांस लिया गया। दूसरे साल 66 करोड़ रुपये का एडवांस लिया गया।
हैरत की बात यह कि कंपनी ने 114 करोड़ की एफडी करा दीं। काम के लिए क्या खर्च किया, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आरपी इन्फ्रा का गजब खेल ये भी सब कांट्रेक्ट लेते समय कंपनी एडवांस लेती थी, लेकिन कांट्रेक्ट देते समय वह सिक्योरिटी के रूप में मोटी रकम जमा दिखाती थी। इस खेल के जरिए बड़ी रकम किकबैक की गई।