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Ramleela: रामानंद सागर की रामायण की याद दिला रही रामलीला...बड़ा बदलाव; पहली बार महिला पात्र

Fri, 12 Sep 2025 10:05 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा की ऐतिहासिक रामलीला में इस बार नए प्रयोग किए गए हैं। रामानंद सागर की रामायण की तरह ही मंचीय लीलाओं की स्क्रिप्ट को तैयार किया गया है। 16 अलग-अलग रामायणों के अध्ययन के आधार पर ये स्क्रिप्ट तैयार की गई है। पहली बार महिला पात्रों को महिलाएं ही निभा रही हैं।
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रामलीला आगरा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर भारत की ऐतिहासिक रामलीला में बृहस्पतिवार से मंचीय लीलाएं शुरू हो गईं। इस बार रामलीला में कई नए प्रयोग किए गए हैं। पहली बार जहां महिला चरित्रों का पात्र महिलाएं निभा रही हैं। वहीं राधेश्याम रामायण से हटकर पहली बार कार्तिकेय संस्था मुरादाबाद के डॉ. पंकज दर्पण अग्रवाल की स्वरचित मौलिक रामलीला का मंचन हो रहा। उन्होंने इसके लिए 16 विभिन्न रामायणों का न केवल अध्ययन किया बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की गरिमा और मौजूदा दौर में रामायण की सार्थकता के अनुसार लीलाओं का स्वरूप तय किया है। पहली बार पात्र नए परिधान, शृंगार और अंदाज में रामलीला प्रस्तुत कर रहे हैं।
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मुरादाबाद की संस्था कार्तिकेय को इस साल श्री रामलीला कमेटी ने मंचन की जिम्मेदारी सौंपी है। पिछले 50 वर्षों से रामलीला से जुड़े संस्था के डॉ. पंकज दर्पण अग्रवाल बताते हैं कि टीवी पर प्रसारित होने वाली रामानंद सागर कृत रामायण मुख्य आधार है। प्लेबैक में संवाद होंगे और पात्रों के रूप में भी रामायण की झलक नजर आएगी।

 

पहली बार रामलीला में एक-दो नहीं बल्कि 7 राज्यों के कलाकार अपने अभिनय की छाप छोड़ेंगे। इनमें सीता और राम का मुख्य किरदार निभाने वाले दोनों कलाकार आगरा के हैं तो लंकापति रावण का किरदार निभाने वाले अभिनव मिश्रा काशी से। इसके अलावा मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ के कलाकार भी शिरकत कर रहे हैं।


 

चार साल के बाद मिला राम का आशीर्वाद
राम का किरदार निभाने वाले शोभित शर्मा मूलत: आगरा की गली मन:कामेश्वर निवासी हैं। कहते हैं राम बरात, श्री राम के माथे पर विशाल मुकुट और उस पर चमकता सूर्य देखकर ही बड़ा हुआ। मन के किसी कोने में इच्छा थी कि मैं भी राम का किरदार निभाऊं। पिछले 4-5 साल से प्रयास कर रहा था, इस साल जाकर सफलता मिली। बीते दिनों अयोध्या में हुई रामायण में भी राम का चरित्र निभाने का अवसर गुरुजी ने दिया। पिछले एक सप्ताह से पूरे दिन अभ्यास कर रहे हैं। मेरे लिए मर्यादा पुरुषोत्तम का किरदार निभाना भगवान राम का आशीर्वाद ही है।


 

सीता का किरदार निभाना है परम सौभाग्य
आगरा के राजपुर चुंगी निवासी मनु शर्मा भी रंगमंच की मंझी हुई कलाकार हैं। बताती हैं कि पिता रामलीला के बहुत शौकीन थे, वो जीवित होते तो बहुत खुश होते। मां के साथ भाई-बहन बेहद खुश हुए। थिएटर से स्नातकोत्तर मनु पिछले आठ साल से रंगमंच से जुड़ी हुई हैं। महिला प्रधान नाटक नाचनी ने रंग मंच की दुनिया में पहचान दिलाई। कहती हैं कि शहर की रामलीला में सीता का पात्र निभाने वाली पहली महिला होने का सौभाग्य मिला, यह भी भगवान का आशीर्वाद है। मनु ने बृहस्पतिवार की लीला में विश्वमोहिनी और माता लक्ष्मी की भूमिका निभाई।

 
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संस्कृत आचार्य हैं रावण का पात्र निभाने वाले अभिनव मिश्रा
रामलीला में रावण का पात्र निभाने वाले अभिनव मिश्रा काशी विद्यापीठ से संस्कृत में आचार्य की उपाधि ले चुके हैं। वह हिंदी के साथ संस्कृत में धारा प्रवाह संवाद बोलते हैं। वेब सीरीज मिर्जापुर में अभिनय कर चुके हैं। कहते हैं रामायण लंकापति राम के बिना अधूरी है। रावण प्रकांड विद्वान था और प्रभु राम की कृपा से ही मुझे यह प्रमुख पात्र निभाने को मिला। इससे पूर्व वह संस्कृत नाटकों में नारद और परशुराम का किरदार निभा चुके हैं। जब वो रावण की तरह अट्टहास करते हैं तो लगता ही नहीं कि पहली बार वह यह किरदार निभाने जा रहे हैं।
 
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