पुलिस की गलती की वजह से तुहीराम 12 साल तक उस केस में अदालत के चक्कर लगाता रहा, जिससे उसका कोई लेना देना नहीं था। पुलिस ने पुलिस ने तुहीराम पुत्र मोनाराम की जगह तुहीराम पुत्र मोहन सिंह को आरोपी बना दिया था।
नाम एक होने की वजह से थाना अछनेरा क्षेत्र के गांव साही निवासी तुहीराम पुत्र मोहन को निर्दोष होने के बाद भी पुलिस की लापरवाही की वजह से अदालत के चक्कर काटने पड़े। जबकि आरोपी तुहीराम पुत्र मोनाराम था। विशेष न्यायाधीश आर्थिक अपराध ज्ञानेंद्र राव ने निर्दोष को बरी करने के आदेश दिया है। लिखा कि विद्युत विभाग आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के स्वतंत्र हैं।
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थाना अछनेरा में दर्ज केस के अनुसार विद्युत विभाग के अवर अभियंता ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 22 नवंबर 2012 को विद्युत बिल का भुगतान नहीं करने पर गांव साही में कुछ ग्रामीणों के विद्युत कनेक्शन विच्छेदित कर दिये गए थे। इसके बाद वह कटिया डालकर विद्युत (बिजली) चोरी कर रहे थे। 29 नवंबर 2012 को उन्होंने टीम के साथ गांव चेंकिग की तो लोग विद्युत चोरी करते पकड़े गए। उनकी तहरीर पर 138(बी) विद्युत अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ। पुलिस ने भी विवेचना के बाद पांच आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। जबकि विद्युत विभाग की टीम ने चोरी करते हुए तुहीराम पुत्र मोना राम कोपकड़ा था।
पुलिस ने निर्दोष तुहीराम पुत्र मोहन सिंह का नाम आरोप पत्र में लिखकर उन्हें आरोपी बना दिया। जानकारी होने पर निर्दोष बुजुर्ग तुहीराम ने विद्युत विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए। इसके बावूजद भी कोई समाधान नहीं हुआ। 2014 में अदालत से नोटिस आने पर उनके होश उड़ गए। निर्दोष होने बाद भी 12 साल अदालत के चक्कर काटने पड़े। जब कहीं जाकर चोरी का कलंक उनके माथे से मिटा।
एक मुकदमा ने बुढ़ापे में करा दी बदनामी और रुपयों की बर्बादी
निर्दोष 73 साल के किसान बुजुर्ग तुहीराम ने बताया कि 2007 में ही उन्होंने अपने नाम का कनेक्शन कटवाकर अपने बेटे कृष्णा के नाम से दूसरा कनेक्शन करा दिया था। उनके नाम पर कोई बिजली बिल भी बकाया नहीं था। 2012 में जब मुकदमा दर्ज हुआ तब तक उन्हें कुछ नहीं पता था। घर पर अदालत को नोटिस आते ही उनके होश उड़ गए। वह नोटिस लेकर पुलिस, विद्युत विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों में खुद बेगुनाह साबित करने के लिए भटकते रहे। मगर किसी ने सुनवाई नहीं की। पूरे का गांव में मुकदमे की वजह से बदनामी हो गई। 12 साल अदालत के चक्कर काटते-काटते लाखों रुपये खर्च हो गए। तब न्याय मिला है। अब क्या कोई उनकी इज्जत और खर्च हुई रकम के साथ समय को लौटा सकता है।