संगमरमरी ताजमहल उस वक्त सतरंगी हो गया, जब 870 मीटर लंबी चादर मुगल बादशाह शाहजहां के उर्स में चढ़ाई गई। शाहजहां के 361वें उर्स में आखिरी दिन तहखाने की असली कब्रों पर जायरीन ने सैकड़ों चादरें चढ़ाईं, जिनमें फूल, मोती और कपड़े की चादरें रहीं। खुद्दाम ए रोजा कमेटी की सतरंगी चादर इनके बीच आकर्षण का केंद्र रही। उर्स में गुरुवार को सुबह से शाम तक ताज में प्रवेश नि:शुल्क होने से सैलाब उमड़ पड़ा।
मुगल बादशाह शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स के आखिरी दिन कुलशरीफ, कुरानख्वानी, फातिहा, गुलपोशी और चादरपोशी की गई। एएसआई, सीआईएसएफ की ओर से सुबह चादर चढ़ाई गईं। खुद्दाम ए रोजा कमेटी ने सर्वधर्म समभाव का संदेश देते हुए 870 मीटर की सतंरगी चादर दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से निकाली। कमेटी अध्यक्ष ताहिरउद्दीन ताहिर के मुताबिक सतरंगी चादर सर्वधर्म की चादर है और इसमें हर धर्म, मजहब का रंग शामिल है। यही हमारे हिंदुस्तान की खूबी है। उर्स में चादरपोशी के दौरान रिजवानउद्दीन, मो. शमशाद, तनवीर अहमद, हाफिज इरफान, आसिम बेग, नईमउद्दीन, नूर मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
उर्स में शाहजहां स्मृति समिति ने कुरान की तिलावत और सलाम के बाद सर्वधर्म चादर चढ़ाई। इस दौरान आरिफ तैमूरी, हाजी इकबाल, खालिद हाशमी, फैसल तैमूरी आदि मौजूद रहे।
अव्यवस्थाओं का रहा बोलबाला
ताजमहल में उर्स के आखिरी दिन लोगों का सैलाब उमड़ आया। शुक्रवार बंदी से पहले गुरुवार को पर्यटकों की संख्या तो ज्यादा रहती ही है, उर्स का आखिरी दिन होने के कारण स्थानीय लोगों का भी जमावड़ा रहा। ऐसे में भारी भीड़ के कारण अव्यवस्थाएं हावी रहीं। ताज मुख्य गुंबद पर लोग बिना शू कवर के ही चले गए, वहीं तहखाने वाली कब्रों तक भी बिना शू कवर के ही लोग पहुंचे। लंगर बांटने के दौरान फोरकोर्ट में हंगामा भी हुआ।