गाड़ियां बाजार में नहीं आ रही हैं
परिवहन मुख्यालय से आए आदेश के बाद आरटीओ में नाबालिग छात्र-छात्राओं के लाइसेंस नहीं बन पा रहे हैं। इसमें आवेदक को अपनी गाड़ी लाकर ही टेस्ट देना है। बाजार में 50 सीसी से कम क्षमता वाली गाड़ी ही उपलब्ध नहीं है। पहले कभी लूना, टीवीएस जैसी गाड़ियां आती थीं।
-अनिल कुमार सिंह, एआरटीओ (प्रशासन)
नया आदेश आने तक लाइसेंस बंद
तकनीकी रूप से परिवहन एक्ट-1988 के तहत पंजीकृत गाड़ियों से ही नाबालिग आवेदकों का टेस्ट लिया जाना है। इस तरह की गाड़ियां ही नहीं हैं। ऐसे में नाबालिग लाइसेंस बनना बंद हो गए हैं। जब तक कोई नया आदेश नहीं आता, यह नहीं बन सकेंगे।
-उमेश कटियार, प्राविधिक निरीक्षक, आरटीओ
रोजाना बनते थे तीन तक लाइसेंस
परिवहन मुख्यालय के सितंबर में आए आदेश से पहले आरटीओ में माइनर लाइसेंस रोजाना दो से तीन तक बनाए जा रहे थे। प्राविधिक निरीक्षक ने बताया कि पहले अभिभावक दोपहिया सौ सीसी की गाड़ी से ही टेस्ट दिला देते थे।
साढ़े आठ साल में बने 7,339 डीएल
आरटीओ के रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी, 2013 से जुलाई, 2021 तक जिले में बिना गियर की गाड़ी चलाने के लाइसेंस 7,339 बनाए गए। प्राविधिक निरीक्षक ने बताया कि इस तरह के लाइसेंस लेने वालों में 95 फीसदी छात्र-छात्राएं हैं। पांच फीसदी बुजुर्गों ने भी यह लाइसेंस बनवाए हैं।
बेटे के लिए लाइसेंस बनवाना है
बेटे के लिए माइनर लाइसेंस बनवाने पहुंचा तो नॉन गियर की गाड़ी लाने की शर्त बताई गई। लाइसेंस नहीं बनवा पा रहे हैं। दलील ये है कि परिवहन एक्ट के तहत यह व्यवस्था है। अगर खामी है तो बदलाव होना चाहिए।
-दीपक खंडेलवाल, बेलनगंज
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