अवैध खनन मामले में प्रदेश सरकार ने खनन मंत्री पर को भले ही मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया हो लेकिन इससे ताजनगरी से गुजर रही कालिंदी के घाव नहीं भरने वाले। खनन माफियाओं ने बिना अनुमति के खनन कर यमुना को खोखला कर दिया है। शहर में कई जगहों पर खुलेआम बालू की मंडी अभी भी बदस्तूर लग रही है।
पिछले कई सालों से कैलाश से हाथीघाट के बीच बालू का अवैध खनन चल रहा है। सबसे ज्यादा पोइया और बल्केश्वर घाट की तरफ अवैध खनन हुआ। यहां एक ही स्थान पर दसियों फुट गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। इसकी वजह से नदी में पानी बढ़ने पर इसकी गहराई का अनुमान लगना मुश्किल हो जाता है।
लहाल नदी में पानी बढ़ने से अवैध खनन थमा हुआ है। लेकिन इससे पहले जेसीबी के माध्यम से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रालियां बालू निकाली जा रही थी। जिम्मेदार अधिकारी भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। यह स्थिति तब है, जबकि शहर में खनन का एक भी पट्टा नहीं है।
दो गुने हुए रेट
नदियों में पानी बढ़ने और अवध खनन पर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद चंबलसेंड और यमुना की बालू के रेट दो गुने हो गए हैं। कमला नगर स्थित काका ट्रेडर्स के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में चंबलसेंड की एक ट्रॉली की रेट 2400 से 2500 रुपये के बीच थी, जोकि बढ़कर 4500 से 5000 रुपये तक पहुंच गई है।
इसी तरह से 1500 रुपये वाली यमुना की बालू की ट्राली अब 2500 से 3000 रुपये में मिल रही है। दरअसल, नदियों का जलस्तर बढ़ने से सेंड नहीं निकल पा रही। पूर्व के स्टाक से ही सप्लाई हो रही है। वहीं, दूसरी ओर हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए अवैध खनन पर भी थोड़ी बहुत लगाम लगी हुई है। ऐसे में भवनों का निर्माण की लागत में भी बढ़ोत्तरी आई है।
शहर में खनन के लिए एक भी पट्टा नहीं दिया गया है। खेरागढ़ में जरूर कुछ पट्टे दिए गए हैं। अवैध खनन को रोकने के लिए समय-समय पर छापेमारी भी की जाती है।
- एमके पांडे, जिला खनन अधिकारी