वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर मिग की खरीद और टेक्नीशियनों के उपलब्ध न होने जैसे सवाल सांसदों ने उठाए थे। उसी साल तीन माह के बाद 10 नवंबर 1962 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लोकसभा में मिग डील पर कहा कि समय पर ही सोवियत संघ भारत को फाइटर जेट देगा। इसके अगले साल ही सोवियत संघ में बने मिकोयान गुरेविच (मिग)-21 भारतीय वायुसेना को सौंप दिए गए।
सात साल बाद भारत में बने मिग विमान
मिग-21 विमान पहले सोवियत संघ से भारत लाकर असेंबल किए गए, लेकिन तकनीकी हस्तांतरण के बाद हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड की नासिक फैक्टरी में इसका निर्माण शुरू हुआ। अमर उजाला आकाईव के मुताबिक 18 अक्तूबर 1970 को रक्षा उत्पादन मंत्री प्रकाश चंद्र ने एयरचीफ मार्शल पीसी लाल को भारत में बना पहला मिग-21 विमान सौंपा था। इसके तुरंत बाद से ही मिग-21 मार्क-2 विमानों को बनाने की कवायद शुरू हुई। 17 अप्रैल 1973 को प्रकाशित खबर में मिग-21 मार्क-2 के साथ चीता हेलिकॉप्टर का निर्माण शुरू होने की जानकारी दी गई।
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जिम्बाब्वे ने भारत से मांगे थे मिग-21 विमान
छह दशक में दुनिया के 60 से ज्यादा देशों तक मिग-21 विमान उड़ान भरते नजर आए। भारतीय वायुसेना में 62 साल की सेवा के बाद यह 19 सितंबर को रिटायर कर दिए जाएंगे। देश का पहला फाइटर जेट पाकिस्तान के साथ वर्ष 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी ताकत दिखा चुका है। लगातार क्रैश की घटनाओं के कारण इसे उड़ता ताबूत करार दिया गया, हालांकि जिम्बाब्वे ने भारत सरकार से वर्ष 1986 में दक्षिण अफ्रीका से व्यापार समझौता तोड़ने के बाद मिग-21 की मांग की थी।