मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मिड डे मील में बुधवार को दूध दिए जाने का
फरमान तो सुना दिया, लेकिन शायद यह नहीं सोचा कि इसे लागू कैसे कराया
जाएगा। 3.82 रुपये में एक गिलास भरकर दूध भला कहां मिलता है? साथ में
कोफ्ते और चावल भी देना है। फिर होना क्या था? पहले दिन ही सीएम का फरमान
फेल हो गया। कहां दूध बंटा ही नहीं, तो कहीं सिर्फ शगुन के तौर पर रस्म
अदायगी की गई। कहीं बच्चे किचन में दूध झांकते रहे, तो कहीं टीचर दूधिया का
इंतजार करते रहे। कहीं-कहीं तो स्कूलों को नई व्यवस्था की जानकारी ही नहीं
थी। पेश है रिपोर्ट...
सीन-1
समय - सुबह 9:45 बजे
स्थान - प्राथमिक विद्यालय ककरैठा
अमर
उजाला की टीम पहुंची तो बच्चे कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे। कुछ बच्चे
किचन में झांक रहे थे। विद्यालय में बुधवार को नए मेन्यू केहिसाब से मिड-डे
मील में बन रहा था। कोफ्ता-चावल पक रहा था। दूध उबालने के लिए रखा गया था।
लेकिन यह शगुन के लिए ही था। विद्यालय में 120 बच्चे पंजीकृत हैं। 90
उपस्थित थे, दूध बड़े खोजे छह लीटर मिला था। जबकि 200 ग्राम के हिसाब से 90
बच्चों के लिए 18 लीटर दूध होना चाहिए था।
सीन-2
समय - सुबह 10:15 बजे
स्थान - प्राथमिक विद्यालय गैलाना
प्रधानाध्यापिका
के कक्ष में टेबल पर खाली बाल्टी, एक डिब्बे में चीनी और गिलास में बादाम
रखा हुआ था। विद्यालय में तैनात शिक्षा मित्र ने बताया कि कोफ्ता और चावल
बनकर तैयार है। दूध ढूंढा जा रहा है। प्रधानाध्यापिका ने एक दूधिया को
साढ़े छह लीटर दूध का आर्डर दिया था। वह दूध लेेकर आया नहीं। स्कूल में 78
बच्चे पंजीकृत हैं, बुधवार को 60 पढ़ने पहुंचे थे। रोज साढ़े नौ बजे बच्चों
को मिड-डे मील मिल जाता है, बुधवार को दूध के इंतजार में लेट हुआ।
यहां पुराने मीनू से बना खाना
आगरा।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक नगला जार में तो बुधवार को भी पुराने मेन्यू
के हिसाब से ही मिड-डे बना। यहां कढ़ी चावल बनाया गया था। वह भी गुणवत्ता
ठीक नहीं दिख रही थी। विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने बताया कि उनको
मेन्यू बदलने का आदेश ही नहीं प्राप्त हुआ है।
बच्चे गिलास लेकर नहीं पहुंचे
आगरा।
कुछ स्कूलों में दूध मंगा लिया गया था, बच्चे रोज की तरह केवल टिफिन या एक
बर्तन लेकर पहुंचे। उसमें बच्चों को कोफ्ता-चावल दिया गया। दूध लेने के
लिए बच्चों को खाना खाने में बाद बर्तन धुलना पड़ा।
पढ़ाई से ज्यादा मिड-डे मील पर रहा ध्यान
आगरा।
बेसिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से लेकर शिक्षकों तक का ध्यान पढ़ाई से
अधिक मिड-डे मील पर रहा। सुबह से लोग दूध खोजने के लिए निकल पड़े। कुछ
लोगों ने डेयरी पर जाकर दूध लिया। पहले दिन को लेकर डरे भी हुए थे कि
मुख्यमंत्री की घोषणा से दूध का वितरण किया जा रहा है, अधिकारी निरीक्षण के
लिए पहुंच सकते हैं।
छदामीपुरा में स्कूल ही नहीं खुला
बाह/पिनाहट। छदामीपुरा के जूनियर हाईस्कूल पर ताला लटका रहा। प्राथमिक विद्यालय पिनाहट प्रथम में प्रधानाध्यापक सुभाश चंद्र ने सूचना न होने पर दूध की व्यवस्था न किए जाने की बात कही।
बाह के पटकुंईयन पुरा गांव के प्राइमरी स्कूल, जूनियर हाईस्कूल में बच्चों को दूध पिलाया गया। चावल और कोफ्ते परोसे गए। आम के पुरा गांव के प्राइमरी और जूनियर स्कूल में बच्चों को मखाने और किसमिस भी दिए गए। चौसिंगी गांव के प्राइमरी स्कूल में बच्चों को चावल दिए गए। जैतपुर के धनियापुरा गांव के स्कूल में मीठे चावल बने। शिक्षक बबलू खान ने बताया कि प्रधान मिड-डे मील बनवाते हैं। यहां न रसोई थी और न ही लकड़ी। कंडों से रसोई जल रही थी। पिनाहट के देवगढ़ गांव के प्राइमरी स्कूल और उटसाना गांव के प्राइमरी स्कूल में दूध दिया गया।
एत्मादपुर: अधिकांश विद्यालय के बच्चे दूध को तरसे
एत्मादपुर। कुछ स्कूलों में सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए दूध और कोफ्ता नहीं दिया गया। गांव गढ़ी हरपाल स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी दूध बांटा गया। प्रधानाचार्य सोनिया ठाकुर ने बताया कि दूध की व्यवस्था करने में काफी दिक्कत हुई। एसडीएम जेपी सिंह का कहना है कि दूध न बांटने की शिकायत मिली है। विद्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा। वहीं सरकार के इस आदेश का विरोध भी शिक्षकों ने शुरू कर दिया है। इस मामले में एसडीएम को ज्ञापन दिया है।
लादूखेड़ा: शिक्षक बोले, पैसे नहीं थे
लादूखेड़ा। परिषदीय विद्यालयों में समुचित बजट न होने के कारण शिक्षकों ने दूध नहीं बांटा। पुराने मेन्यू के हिसाब से ही मिड-डे मील बांटा गया। शिक्षकों ने बताया कि एक बच्चे के लिए 3.59 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि दो सौ एमएल दूध के लिए 11 रुपये चाहिए। ऐसे में दूध कैसे बांटा जा सकता है।
अछनेरा: 177 स्कूलों में से 83 में बांटा दूध (भाई फोटो जरूरी है।)
अछनेरा। अछनेरा विकास खंड के 177 विद्यालयों में से 86 स्कूलों में दूध बांटा गया। 45 विद्यालय अक्षयपात्र संस्था से संबंधित हैं। इन स्कूलों में दूध नहीं बांटा गया। प्राथमिक पाठशाला तृतीय पर एबीएसए भुवनेश कुमारी ने दूध और कोफ्ते दिए। एबीआरसी मनोज कुमार शर्मा, प्रताप सिंह, शिव सिंह, महिपाल सिंह, हेमतला, सोमप्रकाश आदि मौजूद रहे।
सीकरी: इंतजार में बैठे रहे विद्यार्थी
फतेहपुर सीकरी। प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक दूध का इंतजाम नहीं कर सके। ग्राम मंगोली, नगला धीरू, औलेंडा, नगला बीच, नगला बंजारा सहित 14 प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में दूध नहीं दिया गया। हालांकि शिक्षा विभाग के अनुसार, ब्लॉक क्षेत्र के 186 प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में दूध वितरित किया गया।
ये है आदेश
3.86 रुपये में
पहले - बुधवार को कढ़ी चावल या खीर दिया जाता था
अब - कोफ्ता-चावल के साथ 200 एमएल उबला हुआ दूध
परेशानी
200 एमएल दूध की कीमत ही कम से कम आठ रुपये मार्केट में है। दूसरा इतनी मात्रा में शुद्ध दूध मिलना आसान नहीं।