यूपी और उत्तराखंड में जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस पर सियासत हो रही है। तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन सबसे वाजिब सवाल यह है कि आखिर शराब जहर कैसे बन जाती है?
इस सवाल का जवाब होश उड़ा देने वाला है। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों की मानें तो इसके दो कारण हैं। एक तो कच्ची शराब में यूरिया मिलाया जा रहा है। दूसरा इथाइल की जगह मिथाइल अल्कोहल से शराब बनाई जा रही है।
परीक्षण के लिए आने वाले शराब के नमूनों की संख्या देखकर यह भी पता चलता है कि पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा अवैध सहारनपुर मंडल में ही बन रही है। लैब में आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली और झांसी मंडलों से सैंपल आते हैं। रसायन अनुभाग में हर माह 50 से 60 सैंपल आ रहे हैं।
सबसे ज्यादा सैंपल शामली से आए
इनमें से 20 से 25 सैंपल अकेले सहारनपुर मंडल के तीन जिलों सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर से होते हैं। इनमें सबसे ज्यादा सैंपल शामली से आते हैं। थानावार देखें तो सबसे ज्यादा सैंपल झिंझाना थाना क्षेत्र के हैं। सैंपल के परीक्षण से पता चलता है कि दो वजहों से शराब जहरीली बन रही है। एक तो शराब में यूरिया मिलाया जा रहा है। ऐसा शराब का नशा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
जब यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है तो शराब विषैली हो जाती है और पीने वालों की जान ले लेती है। यूरिया का इस्तेमाल कच्ची शराब में होता है, जिससे भट्टी पर बनाया जाता है। दूसरा कारण है मिथाइल अल्कोहल से शराब बनाना। यह शराब भट्टी पर नहीं बनाई जाती है। सीधे मिथाइल अल्कोहल में कुछ एसेंस मिलाकर थैलियों और बोतलों में पैक कर दिया जाता है।
इथाइल और मिथाइल में अंतर करना मुश्किल
इथाइल के मुकाबले मिथाइल सस्ता होता है। मिथाइल बहुत खतरनाक है। आगरा कॉलेज के रसायन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित अग्रवाल का कहना है कि इथाइल और मिथाइल अल्कोहल में अंतर करना आसान नहीं है।
गंध, रंग, स्वाद में दोनों एक जैसे होते हैं। अंतर केवल लैब टेस्ट से ही हो सकता है। कई लोग टैंकरों से अल्कोहल चोरी कर शराब बनाते हैं। कई बार इथाइल की जगह मिथाइल का टैंकर आ जाता है। लोग इसे इथाइल समझकर निकाल ले जाते हैं।
जान बच भी जाए तो दुनिया नहीं देख पाते
डॉक्टर अमित अग्रवाल बताते हैं कि शराब में यूरिया ज्यादा हो या फिर वह मिथाइल अल्कोहल से बनी है, दोनों ही सूरत में अंगों को नुकसान पहुंचाती है। सबसे पहला नुकसान तंत्रिका तंत्र को होता है। इसमें भी आंखों को रोशनी देने वाली नसें सबसे पहले डैमेज होती हैं। अगर जहरीली शराब पीने वाला शख्स बच भी जाए तो उसकी आंखों की रोशनी बच पाना बहुत मुश्किल होता है।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक एके मित्तल ने बताया कि अवैध शराब के सबसे ज्यादा सैंपल सहारनपुर मंडल से आ रहे हैं। शराब में यूरिया की काफी मात्रा मिल रही है। इसी से शराब विषैली हो जाती है।