जीएसटी पर आगरा के दवा विक्रेता पसोपेश की स्थिति में है। कर निर्धारण स्पष्ट न हो पाने के चलते दवा खरीद 80 फीसदी कम हो गई। दवा विक्रेता मानते हैं कि अगले पांच-सात दिन में स्थिति और बिगड़ सकती है। सबसे ज्यादा मार सस्ती कीमत की दवाओं पर होगी।
कम मुनाफा और जीएसटी स्पष्ट न होने तक दवा विक्रेता इनकी खरीद से बच रहे हैं। ऐसे में मधुमेह, जुकाम-खांसी के सीरप, बुखार, दर्द की दवाएं जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली दवाओं की मारामारी होने के आसार हैं।
भारत बंदी में दवा विक्रेता शामिल नहीं रहे। फव्वारा दवा बाजार पूरी तरह से खुला रहा, लेकिन खरीदार नदारद थे। मेडिकल ट्रैडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव पुनीत कालरा बताते हैं कि 80 फीसदी बिक्री कम हो गई है।
बाजार में बिना बिल के स्टाक खत्म होने के बाद किल्लत बढ़ेगी। आगरा फार्मा एसोसिएशन के महेश सिंघल ने बताया कि भारत बंदी में दवा विक्रेता शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन जीएसटी को लेकर अभी तक भ्रम की स्थिति है।