आगरा निगम में महापौर के ‘चिट्ठी बम’ का असर आज दिख सकता है। इसमें संविदा कर्मियों की सेवा प्रदान करने वाली फर्म अग्रवाल एंड कंपनी को सेवा विस्तार देने पर नगर आयुक्त से जवाब-तलब किया गया था।
आगरा की महापौर और नगर आयुक्त के बीच चल रहे शीत युद्ध का असर शुक्रवार को दो दिन बाद दफ्तर खुलने पर दिख सकता है। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा का एक पत्र तीन दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था।
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इसमें संविदा कर्मियों की सेवा प्रदान करने वाली फर्म अग्रवाल एंड कंपनी को सेवा विस्तार देने पर नगर आयुक्त से जवाब-तलब किया गया था। इस पत्र के बाद से कंपनी की भर्तियों और कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। चूंकि हर वार्ड में होने वाली दस-दस सफाई मित्रों की भर्ती का जिम्मा भी इसी कंपनी के जिम्मे था। ऐसे में अब इस नियुक्ति पर भी संकट छा गया है।
उधर, महापौर ने शहर की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए बनाए गए प्रस्तावों को मंजूरी देने में देरी व टेंडर न करने पर भी सवाल उठाए थे। ऐसे में अब शुक्रवार को टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के बारे में फैसला होने की संभावना है।