मथुरा। वृंदावन कुंभ मेला क्षेत्र में महंत एवं साधु लोग अपने-अपने पंडालों को उखाड़ने में लगे हैं।
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वृंदावन (मथुरा)। वसंत पंचमी से शुरू हुआ वृंदावन कुंभ अब पूर्ण हो गया है। रंगभरनी एकादशी की परिक्रमा के बाद यमुना के तट पर लगे संतों के शिविर अब उखड़ने लगे हैं। संतों की टोलियां हरिद्वार कुंभ के लिए कूच करने लगी हैं।
16 फरवरी को वसंत पंचमी से वृंदावन में वैष्णव संतों के कुंभ की शुरूआत हुई थी। हजारों संतों ने यहां डेरा डालते हुए भगवान कृष्ण की आराधना की। यमुना का पूजन किया। श्रीबांकेबिहारी के दर्शन किए। रंगभरनी एकादशी को भगवान कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन की परिक्रमा भी की। इसी के साथ संतों का यह कुंभ पूर्ण हो रहा है। इसी के साथ वैष्णव संतों ने अब वृंदावन से हरिद्वार के लिए प्रस्थान करना शुरू कर दिया है।
संतों की टोलियां हरिद्वार जाने लगी हैं। बड़ी संख्या में यहां से संत हरिद्वार जा चुके हैं। विभिन्न मंदिर, आश्रम, सामाजिक संस्थाओं के साथ संत-महंतों के शिविर भी अब उखड़ने लगे हैं। मजदूर टेंट उखाड़ते हुए सामान को एकत्रित करने में जुट गए हैं। यहां करीब तीन सौ से अधिक शिविर लगाए गए थे। करीब 40 दिन तक चमक दमक वाला यह क्षेत्र अब एक बार फिर सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है।