वृंदावन (मथुरा)। कोविड के चलते सब कुछ अस्त-व्यस्त है। मंदिरों की परंपराएं भी औपचारिकता मात्र पूरी की जा रही हैं। इन दिनों जहां श्रीबांकेबिहारी मंदिर फूलों से सजता था, अब वहां कुछेक फूल ही ठाकुरजी की शोभा बन रहे हैं। भक्तों की गैर मौजूदगी के चलते बिहारीजी मंदिर में खामोशी रही तो श्रीराधावल्लभ जी के आंगन में समाज गायन की गूंज रही।
मंगलवार को चैत्री पूर्णिमा के बाद भी श्रीबांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की मौजूदगी बहुत ही सीमित रही। बहुत देर बाद एक-दो भक्त मंदिर में दर्शन करते हुए प्रवेश करते। मंदिर परिसर भी पूरी तरह से खाली था। ठाकुरजी को गर्मी से बचाने के लिए उनके आसपास अवश्य फूल लगे थे, बाकी सब कुछ सामान्य था। हालांकि श्रीराधावल्लभ मंदिर में समाज गायन की गूंज रही। यहां मंदिर के सेवायत समाज गायन से ठाकुर जी की सेवा में जुटे रहे। दर्शनार्थियों की संख्या यहां भी बहुत ही सीमित रही। आसपास के लोग ही दर्शन के लिए मंदिर में नजर आए। अन्य मंदिरों का भी यही हाल था।