कोसीकलां (मथुरा)। सोमवार को श्रीपद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ किया गया। विधानाचार्य ने कहा कि इस विधान के करने से प्राणी संसार चक्र से छूटकर सिद्धशिला को प्राप्त करता है। भक्तों ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। मंदिर में भक्ति की धूम रही।
विधानाचार्य पंडित अभिषेक जैन के निर्देशन में पीत वस्त्रधारी इंद्र स्वरूप भक्तों ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। म्यूजिकल ग्रुप ने भजन प्रस्तुत किए। झंडारोहण के साथ विधान का शुभारंभ समाज के अध्यक्ष सुभाष जैन, कैलाश चंदौरिया, राजेंद्र जैन द्वारा किया गया। इंद्र-इंद्राणियों ने भगवान अजितनाथ और शांतिनाथ का पूजन किया। विधानाचार्य डॉ. श्रेयांस जैन ने दिशा शुद्धि, दिग्बंधन आदि क्रियाएं कराई गई। सौधर्म इंद्र द्वारा मंडल पर आठ अर्घ समर्पित किए गए।
इस मौके पर विधानाचार्य अभिषेक जैन ने कहा कि कहा कि आत्मा का स्वरूप सिद्धत अवस्था को प्राप्त करना है। व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरो़ं के अहित में लगा हुआ है। वह अपने दु:ख से दु:खी न होकर दूसरों के सुख से दु:खी है। व्यक्ति को अपने अवगुण देखने चाहिए और दूसरे के गुणों को देखना चाहिए।
इस दौरान विमल जैन, कैलाश सराफ, स्वेता जैन, राहुल जैन, दीपक जैन, लक्ष्मन जैन, नवीन जैन, प्रवीन जैन, निर्मला जैन, ऊषा, सीमा, सीमा, अनीता व नितिन जैन मौजूद थे।