करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा, विद्यालय संचालकों के खिलाफ एफआईआर और फिर अधिकारियों की रिपोर्ट। शिक्षा माफिया के आगे यह सब कुछ बौना साबित हो रहा है। शासन तक सब कुछ पहुंचने के बाद भी विद्यालय संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही विद्यालय विभाग के साथ मिलकर फिर से छात्रवृत्ति पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
वर्ष 2020 में करोड़ों की छात्रवृत्ति के घोटाले का खुलासा हुआ। घोटाले का खुलासा होते ही विभाग से लेकर सचिवालय तक में हड़कंप मच गया। शासन ने तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी तथा कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। तत्कालीन से लेकर दो पूर्व समाज कल्याण अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। 86 विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई, लेकिन इन विद्यालयों को मान्यता देने वाले शासन ने कोई कार्रवाई नहीं। डीएम के द्वारा इन विद्यालयों को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को लिखा भी गया, फिर भी कुछ नहीं हुआ।
150 शिक्षण संस्थाएं मौके से मिलीं गायब
शासन द्वारा छात्रवृत्ति पाने वाली शिक्षण संस्थाओं की वस्तुस्थिति जानने के लिए स्थलीय निरीक्षण कराया गया। यह स्थलीय निरीक्षण एसडीएम द्वारा किया गया, जिसमें करीब 150 शिक्षण संस्थाएं मौके से नदारद मिलीं। यह रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
नहीं हो सकी कोई कार्रवाई
जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र नाथ प्रताप सिंह ने बताया कि जिन शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले में रिपोर्ट दर्ज हुई है अभी तक शासन द्वारा उन्हें ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया है। हमने इन शिक्षण संस्थाओं को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को लिखा है। शिक्षण संस्थाएं मौके से नदारद मिलीं, उनके खिलाफ भी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
मिल चुकी है धमकी
बता दें 8 मार्च 2022 को कई विद्यालयों के संचालक समाज कल्याण विभाग पहुंचे थे। समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र नाथ प्रताप पर डाटा फॉरवर्ड करने को दबाव डालने लगे। उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी पर दबाव डाला तथा कार्यालय से निकलने पर देख लेने की धमकी दी। वह किसी प्रकार से कार्यालय से निकल सके। उनके जाने के बाद कार्यालय के कर्मचारियों को भी धमकियां दी थीं।