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लॉकडाउनः मथुरा में बंद फैक्टरी में मिले कई प्रदेशों के मजदूर, मुकदमा दर्ज

Wed, 15 Apr 2020 12:26 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

फैक्टरी मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, सभी का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
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फैक्टरी पर छापा की कार्रवाई के दौरान मथुरा पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा शहर के बीच चौक बाजार स्थित गली मेघा में लॉकडाउन के दौरान फैक्टरी संचालन की शिकायत पर मंगलवार को पुलिस ने छापा मारा। फैक्टरी बंद थी, लेकिन कई प्रदेशों के 44 मजदूर मौके पर मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग की है। फैक्टरी मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब कोरोना वायरस से लड़ने के लिए लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराने का संदेश दे रहे थे, उसी वक्त थाना गोविंदनगर पुलिस और डीएम को चौक बाजार स्थित गली मेघा में गोल्ड कास्टिंग फैक्टरी के संचालन की सूचना दी गई। इस सूचना से पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया।

तत्काल ही पुलिस ने घर में बनी फैक्टरी पर छापा मारा। पुलिस को मौके पर 44 मजदूर मिले। यह मजदूर गुजरात, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के रहने वाले हैं। इसमें चार बाल मजदूर भी शामिल हैं। लॉकडाउन के दौरान बगैर किसी सूचना के कई राज्यों के मजदूरों को एक ही स्थान पर देख पुलिस के अधिकारी दंग रह गए।
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पुलिस ने फैक्टरी मालिक त्रिलोकीनाथ चौधरी के खिलाफ कृष्णा सोनी आदि की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें धारा 144, सोशल डिस्टेंसिंग और
लॉकडाउन के उल्लंघन की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मजदूरों की स्क्रीनिंग की है।

फैक्टरी चालू हालात में नहीं मिली। इतना जरूर है फैक्टरी में 44 मजदूर मिले हैं। फैक्टरी के बड़े हॉल में यह मजदूर रह रहे थे। सामाजिक दूरी का पालन भी होता मिला। लॉकडाउन के चलते यह मजदूर अपने घर नहीं लौट सके। इन मजदूरों के भोजन की व्यवस्था मालिक ही कर रहा है। फैक्टरी मालिक त्रिलोकी नाथ चौधरी और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। - अजय कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक गोविंद नगर।

कुत्तों के लड़ने से खुली पोल

लॉकडाउन के चलते इन दिनों जानवरों के समक्ष भोजन का संकट पैदा हो गया है। गली मेघा में मंगलवार को कुत्तों के लड़ने की आवाज ने आसपास के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। पता चला कि किसी ने बड़ी मात्रा में भोजन गली में फेंक दिया है। इसमें मांस को लेकर कुत्ते आपस में लड़ रहे थे। इस पर क्षेत्रीय लोगों को शक हुआ। जानकारी करने पर पता चला कि गोल्ड कास्टिंग फैक्टरी से फेंका गया है। 
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आवासीय क्षेत्र में फैक्टरी का संचालन
पिछले साल एनजीटी में यह मुद्दा उठा था कि शहर की घनी आबादी के बीच औद्योगिक गतिविधियों का संचालन हो रहा है। इस पर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस, प्रदूषण, नगर निगम और विद्युत निगम ने संयुक्त कार्रवाई की थी। इसके बावजूद उक्त फैक्टरी का संचालन गोपनीय बना रहा। इससे निकलने वाले रसायन यमुना के लिए बेहद खतरनाक हैं।

पुलिस कार्रवाई पर उठते सवाल
क्षेत्रीय लोगों की शिकायत के बाद गोविंद नगर थाना पुलिस ने जिन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है, उसे लेकर अनेक सवाल उठ रहे हैं। यह फैक्टरी शहर के बीच घनी आबादी में आखिर किसकी अनुमति पर संचालित हो रही थी। इसका उल्लेख पुलिस रिपोर्ट में नहीं किया गया है। 44 मजदूरों में चार बाल श्रमिक की मौजूदगी पर भी पुलिस खामोश रही है। 

मिठाई के कारखाने का वीडियो वायरल
पिछले दिनों सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें चौक बाजार क्षेत्र में एक मिठाई के कारखाने में कई मजदूरों को काम करते हुए दिखाया गया था। लॉकडाउन में जब पूरे देश के कारखाने और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं। ऐसे में मिठाई के कारखाने में मजदूरों की मौजूदगी और काम होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
 
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