वृंदावन (मथुरा)। श्रीराधाकृष्ण की लीला भूमि के सबसे प्राचीन मंदिरों में शुमार मंदिर गोविंद देव को बदहाली से निजात दिलाने की पहल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की जा रही है। सोमवार को मंडलीय अधीक्षण पुरातत्व विद के नेतृत्व में पुरातत्व इंजीनियरों की टीम ने मंदिर का निरीक्षण किया। इस दौरान जयपुर राजघराने के सदस्य भी मौजूद रहे।
वृंदावन के वर्तमान स्वरूप में सबसे प्राचीन भवनों में मंदिर गोविंददेव और मदनमोहन शामिल हैं। यह दोनों ही प्राचीन मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन हैं। इसके बावजूद इन दोनों प्राचीन मंदिरों के भवनों की स्थिति बेहद खराब है। आए दिन पत्थर मंदिर भवन से टूटकर गिरते रहते हैं। बेजोड़ वास्तुकला का नमूना होने के बाद भी बाहरी पर्यटकों ने यहां जाना छोड़ दिया है। बहुत कम ही श्रद्धालु गोविंद देव और मदन मोहन मंदिर जाते हैं।
अब इस स्थिति से गोविंददेव मंदिर को निकालने के लिए एएसआई की टीम यहां काम करने जा रही है। अधीक्षण पुरातत्व विद बसंत लाल स्वर्णकार ने पुरातत्व इंजीनियरों के साथ मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। अधीक्षण पुरातत्व विद बसंत लाल स्वर्णकार ने बताया कि जल्द ही इस प्राचीन भवन की मरम्मत का काम शुरू होने जा रहा है। कुछ सौंदर्यीकरण भी प्रस्तावित है।
अवैध निर्माण के लिए राज्य की एजेंसी जिम्मेदार
गोविंददेव मंदिर के निरीक्षण को आए अधीक्षण पुरातत्व विद बसंत लाल स्वर्णकार ने बताया कि पुरातत्व महत्व की इमारतों के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहे निर्माण के लिए राज्य की इकाई जिम्मेदार हैं। उनके विभाग द्वारा समय-समय पर इसकी जानकारी पुलिस और प्राधिकरण को दी जाती रही है।