दो साल बाद भी मथुरा के जवाहर बाग हिंसा के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव की मौत का वैज्ञानिक प्रमाण न पुलिस के पास है और न ही सीबीआई के। आज भी वो कई मुकदमों में वांछित है।
एक साल से जांच कर रही सीबीआई भी रामवृक्ष के मामले में फिलहाल खाली हाथ दिख रही है। रामवृक्ष की डीएनए जांच में भी उसकी मौत का खुलासा नहीं हो सका।
साल 2014 में मध्य प्रदेश के सागर से दिल्ली तक पैदल यात्रा लेकर चले स्वाधीन भारत संगठन के कर्ताधर्ता रामवृक्ष यादव सैकड़ों समर्थकों के साथ मथुरा के जवाहर बाग में कब्जा जमा लिया था।
दो जून 2016 को हुई थी हिंसा
पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने रामवृक्ष से जवाहर बाग खाली कराने का काफी प्रयास किया, पर राजनीतिक दलों का संरक्षण प्राप्त रामवृक्ष से जवाहर बाग को कब्जा मुक्त कराने में मथुरा पुलिस-प्रशासन नाकाम रहा।
दो साल तक जवाहर बाग पर कब्जा जमाए रामवृक्ष को हटाने के लिए दो जून 2016 को पुलिस और प्रशासन के अफसर पूरे फोर्स के साथ पहुंचा। जवाहर बाग पर हुई हिंसा में दो पुलिस अफसरों समेत 29 लोगों की जाने गईं।
इसकी गूंज दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सुनाई दी। इस हिंसा के बाद से पुलिस रामवृक्ष की मौत होना बताती रही। दो साल पूरे होने के बाद अभी तक रामवृक्ष को पुलिस मरा साबित नहीं कर सकी है।
सीबीआई कर रही है जांच
करीब एक साल से जवाहर बाग हिंसा की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई भी फिलहाल खाली हाथ दिख रही है। इस हिंसा में मारे गए दो पुलिस अफसरों के परिवार को न्याय अभी तक नहीं मिल सका है।
एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव की जवाहर बाग हिंसा में शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। दो पुलिस अफसरों समेत 29 की जान जाने के बाद मथुरा के लोगों में उबाल देखा गया था।
शहीद एसपी सिटी की पुण्यतिथि पर उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी और छोटे भाई प्रफुल्ल द्विवेदी शनिवार को परिवार के साथ मथुरा पहुंचेंगे। जवाहर बाग पहुंचकर शहीद एसपी सिटी का परिवार श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए पौधरोपण करेगा।