दो जून 2016 की शाम मथुरा कभी नहीं भूल पाएगा। यह वो दिन था जब जवाहर बाग को अवैध कब्जे से मुक्त तो करा लिया गया लेकिन वह दिन मथुरा को कड़वी याद दे गया। जवाहर बाग में दो जून 2016 को पुलिस जब बाग में घुसी तो कब्जाधारी पागलों की तरह पुलिस पर टूट पड़े थे। पुलिस पूछताछ में रामवृक्ष के खास साथी ने तो खुलासे किए थे वे वाकई चौंकाने वाले हैं।
जवाहर बाग हिंसा में गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के खास सिपाही राकेश गुप्ता ने पुलिस को बताया कि दो जून को जब पुलिस जवाहर बाग में दाखिल हुई तो रामवृक्ष ने अपने कैंप में लगे लाउडस्पीकर से आदेश देना शुरू कर दिया था। वह कह रहा था कि सभी लोग आगे बढ़कर पुलिस का मुकाबला करो। गोली चलाओ। बम फेंको और एक-एक पुलिस वाले को मार डालो। कलक्ट्रेट और तहसील को घेर लो।
राकेश के अनुसार ढाई साल से जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठा रामवृक्ष यादव जानता था कि उस पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जबरन बाग खाली कराएगी लिहाजा उसने उसी तरह से तैयारियां कर ली थीं। हथियार, कारतूस और भारी मात्रा में गोला-बारूद इकट्ठा कर लिया था। बदायूं से गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के फाइनेंसर राकेश गुप्ता ने जो खुलासा किया है वह वाकई हिला देने वाला है।
जैसे ही पुलिस जवाहर बाग में दाखिल हुई रामवृक्ष अपने कैंप से बाहर निकल आया और सभी लड़कों को पेड़ों पर चढ़कर मोर्चा संभालने के लिए कहा। माइक से आदेश दिया कि जितने भी हथियार हैं सभी को निकाल लो। एक कैंप में असलहा थे, जिन्हें लेने के लिए सभी पहुंच गए। बम भी वहां से निकाल लिए गए।
रामवृक्ष के आदेश पर बम फेंकने शुरू कर दिए गए। पुलिस पर फायरिंग शुरू हो गई। चंदनबोस के साथ रहने वाले लड़कों ने सबसे पहले गोली चलाई। रामवृक्ष भीड़ से कह रहा था कि हमें कलक्ट्रेट पर कब्जा करना है। लिहाजा सभी लोग वहां जाकर बैठ जाओ।
राकेश बोला जब पुलिस ने कार्रवाई तेज की तो वह घबरा गया था और अपनी लाइसेंसी बंदूक छोड़कर पत्नी के साथ भाग गया। सीधे स्टेशन पहुंचा और ट्रेन पकड़कर अपनी ससुराल बरेली चला गया। अपने सभी मोबाइल और सिम बंद कर दिए थे। राकेश गुप्ता से जब रामवृक्ष की मौत के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह तो अपनी पत्नी को लेकर वहां से भाग गया था। इसलिए उसे पता नहीं कि रामवृक्ष मरा है या नहीं। उसने अपने सारे मोबाइल भी फेंक दिए थे।