‘ये हौंसलों की उड़ान है, इनकी मंजिल सातवां आसमान है।’ छोटे से गांव कोयला अलीपुर में खेतों में मजदूरी करने वाले सुरेंद्र ने अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए जी तोड़ मेहनत की।
फीस भरने के लिए घर में रुपये नहीं थे तो साहूकार से कर्ज ले लिया, लेकिन बेटियों की शिक्षा को नहीं रुकने दिया। गांव कोयला अलीपुर के सुरेंद्र मूलत: राजस्थान के रहने वाले हैं। गांव में खेतों में मजदूरी करते हैं। उनकी तीन बेटियां है।
बेटियों में पढ़ने की लगन थी, लेकिन पिता के पास धन का अभाव था। बड़ी बेटी प्रियंका की आंखों में पुलिस में भर्ती होने का सपना पल रहा था।