कोसीकलां (मथुरा)। दशलक्षण पर्व के आठवें दिन शुक्रवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम त्याग धर्म का पालन करने का संकल्प लिया। इस दौरान जिनालयों में विधानों का आयोजन किया गया। भगवान की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं द्वारा अभिषेक किया गया। पीत वस्त्र धारण कर श्रद्धालुओं ने पंडित सूरज प्रकाश शास्त्री के निर्देशन में संगीत की मधुर लहरियों के बीच नित्य नियम की पूजा की।
प्रवचन सभा में सूरज प्रकाश शास्त्री ने कहा कि त्याग शब्द का ही अर्थ होता है छोड़ना और जीवन को संतुष्ट बनाकर अपनी इच्छाओं को वश में करना है। यह न सिर्फ अपने गुणवान कर्मों में वृद्धि करता है बल्कि बुरे कर्मों का नाश भी करता है। छोड़ने की भावना जैन धर्म में सबसे अधिक है। जैन संत अपने घर बार ही नहीं अपने कपड़े को भी त्याग कर देता है और पूरा जीवन दिगंबर मुद्रा धारण करके व्यतीत करता है।
इस मौके पर समाज के अध्यक्ष सुभाष जैन, मंत्री कैलाश चंदौरिया, देवेंद्र जैन देवो, अखिल जैन, कैलाश सराफ, राजेंद्र, अशोक कांमिया, राहुल जैन, विनोद जैन, प्रेमचंद जैन, नवीन जैन, प्रवीन जैन, मुकेश जैन, सोमराज जैन आदि थे।