30 सितंबर को होगा याचिका पर निर्णय
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से सीनियर सिविल जज की अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। चूंकि कोर्ट में न्यायिक अधिकारी अवकाश पर हैं। इस कारण सुनवाई लिंक कोर्ट एडीजे पॉक्सो कोर्ट में हो रही है। न्यायाधीश छाया शर्मा द्वारा याचिका पर 30 सितंबर को निर्णय लिया जाएगा। - भगत सिंह आर्य, एडीजीसी एडीजे-2 फास्ट ट्रैक कोर्ट।
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सबको न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास रखना चाहिए
यह एतिहासिक तथ्यों पर आधारित मुकदमा है। इस पर बहुत से साक्ष्य इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। लिहाजा न्यायिक प्रक्रिया के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। इसलिए सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास रखना चाहिए। - भीष्म दत्त सिंह तोमर, एडीजीसी क्रिमिनल।
तथ्य और साक्ष्यों पर टिकी है न्यायिक प्रक्रिया
न्यायिक प्रक्रिया तथ्यों और साक्ष्यों पर टिकी है। इतिहास के पन्नों में दर्ज तथ्यों और मौजूद साक्ष्यों का गंभीरता से अध्ययन करना होगा। - संजय गौड़, डीजीसी सिविल।
आपसी मेलजोल बनाए रखें
मथुरा धर्म व सौहार्द की नगरी है। यह मामला भले ही दो धर्मों के बीच का हो लेकिन हमें न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखना चाहिए और आपसी मेलजोल बनाए रखना है।
- सार्थक चतुर्वेदी, अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट।
धर्म की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण से सीखी: रंजना अग्निहोत्री
मथुरा। सिविल कोर्ट में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से याचिका दाखिल करने वाली भगवान श्रीकृष्ण की सखी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री का कहना है कि धर्म के मार्ग पर चलना उन्होंने श्रीराम से सीखा है और धर्म की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण से सीखी है। लखनऊ की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री श्रीराम जन्मभूमि केस की 25 वर्षों तक अधिवक्ता रह चुकी हैं तथा कई हिंदूवादी संस्थाओं का संचालन भी करती हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की सखी भाव से वह आराधना करती हैं और उसी भाव से उन्होंने केस दाखिल किया है।
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