वह सिर्फ बच्चों को ही नहीं पढ़ाते हैं बल्कि प्रदेश भर के शिक्षकों को सिखाते हैं कि गणित को सरल और प्रभावी ढंग से कैसे पढ़ाया जाए। संक्रमण काल में बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे तो उन्होंने उन्हें पढ़ाने के लिए पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन तैयार किया।
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चुने गए सत्यपाल सिंह को यह सम्मान गणित की पढ़ाई के सरल तरीके बनाने के लिए मिला है। वह गणित के जटिल सूत्रों को सरल बनाने पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। वह सिर्फ बच्चों को ही नहीं पढ़ाते हैं बल्कि प्रदेश भर के शिक्षकों को सिखाते हैं कि गणित को सरल और प्रभावी ढंग से कैसे पढ़ाया जाए। संक्रमण काल में बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे तो उन्होंने उन्हें पढ़ाने के लिए पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन तैयार किया।
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वह पूर्व माध्यमिक विद्यालय कागारौल-वन में गणित के सहायक अध्यापक हैं। फतेहपुर सीकरी के पास स्थित मई बुजुर्ग गांव के निवासी हैं। राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए उनका नाम उनके नवाचार के लिए ही भेजा गया था।
हालांकि आवेदन में उनकी और भी खूबियां थीं लेकिन सबसे ऊपर गणित के जटिल सूत्रों को सरल तरीके से पढ़ाना ही था। उन्होंने बताया कि वह पांच मई 2010 से विद्यालय में कार्यरत हैं। कोरोना महामारी के दौरान कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाने के लिए पावर प्वाइंटर प्रेजेंटेशन (पीपीटी) तैयार किया।
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बाल अपराध रोकने के लिए कराई कार्यशालाएं
सत्यपाल सिंह ने साथी शिक्षकों के साथ मिलक बाल अपराध से बचने के लिए कार्यशालाएं कराई हैं। इसमें बच्चों और अभिभावकों को जागरूक किया। बच्चों को बताया कि वह कभी कसी अनजान के साथ न जाएं। उनके विद्यालय में छात्र संख्या अधिक (308) है। जिले का यह दूसरा सर्वाधिक छात्र संख्या वाला विद्यालय है।
नवाचार के लिए करते हैं परिचर्चा
सत्यपाल सिंह न्याय पंचायत, ब्लॉक और जिले स्तर पर शिक्षकों के साथ शिक्षण में नवाचार को अपनाने के लिए परिचर्चा करते हैं। प्रदर्शनी में अपने नवाचारों को प्रदर्शित भी करते रहते हैं। इन्होंने पांच मॉड्यूल लेखन में काम किया। मॉड्यूल राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद जारी करता है। सत्यपाल सिंह गणित विषय के राज्य स्तरीय संदर्भदाता हैं।
प्राइवेट स्कूलों से अधिक छात्र संख्या
सत्यपाल सिंह का कहना है कि कहना है कि उनके आसपास तीन निजी, एक सहायता प्राप्त और एक परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। किसी में भी 70 से अधिक छात्र संख्या नहीं है। चीत गांव, विश्रामपुर अन्य आसपास के गांवों में स्कूल होते हुए भी वहां के विद्यार्थी उनके विद्यालय में पढ़ने आते हैं।
काम करने के लिए नई ऊर्जा मिली है
राज्य पुरस्कार के लिए चयन किए जाने से नई ऊर्जा मिली है। और अधिक ताकत के साथ काम करेंगे। जितना संभव होगा, सेवा करेंगे। - सत्यपाल सिंह, सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, कागारौल-वन
इन्होंने दी बधाई
बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर, जिलाध्यक्ष केशव दीक्षित, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री बृजेश दीक्षित ने सत्यपाल सिंह को राज्य पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई दी है।