विक्रम सिंह छुट्टी के बाद 13 मई को पुलवामा के लिए निकले थे। जाते वक्त घर वालों से कहकर गए कि जल्द ही वापस आऊंगा। कौन जानता था कि विक्रम सिंह का पार्थिव शरीर वापस आएगा।
मंगलवार शाम को तिरंगे में लिपटकर शहीद का पार्थिव शरीर लाडपुर गांव लाया गया। पहले विक्रम सिंह के शव को उनके घर पर ले जाया गया। यहां परिवार वालों ने अंतिम दर्शन किए।
हजारों की भीड़ अंतिम दर्शन को पहुंची थी। लिहाजा शव को स्कूल परिसर में दर्शन के लिए रखवाया गया। यहां सेना की टुकड़ी ने सलामी दी। इसके बाद अंतिम विदाई को ले जाया गया।
सेना की टुकड़ी ने दी सलामी
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शहीद विक्रम सिंह को उनके डेढ़ साल के बेटे वंश ने मुखाग्नि दी। वंश को उसके दादा विक्रम सिंह ने गोद में उठा रखा था। मासूम को मुखाग्नि देते देख यहां मौजूद लोगों की आंख भर आई।
कोई भी अपने आंसू रोक नहीं पा रहा था। इस दौरान प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी के साथ सभी विधायक और सियासी, सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद रहे।