एसएन में कैंसर रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि कैंसर से पीड़ित महिला मरीजों में सर्वाइकल कैंसर दूसरे नंबर पर है। बीते साल 1823 मरीज आए, इसमें से 541 महिलाएं थीं। इनमें 137 स्तन कैंसर और 97 सर्वाइकल कैंसर की मरीज थीं, बाकी अन्य अंगों की रहीं।
सर्वाइकल कैंसर के 70 फीसदी मरीज तीसरे या चौथे स्टेज में दिखाने आए। केस स्टडी में पाया गया कि 15-17 साल की उम्र में शादी हुई। सालभर के अंतराल में बच्चे भी अधिक हुए। साफ-सफाई में लापरवाही हुई। कुछ में तो एक से अधिक यौन साथी रहे। इस मर्ज को पनपने में 12 से 15 साल लगते हैं।
एंटी सर्वाइकल वैक्सीन से बचाव
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा ने बताया कि यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से होता है। कई बार महिलाएं लक्षणों का नजरंदाज करती हैं। इससे बचने के लिए एंटी सर्वाइकल वैक्सीन लगवाना जरूरी है। इसमें 9-14 साल तक को दो डोज और 15-26 साल की उम्र की किशोरी-महिलाओं में तीन डोज लगते हैं। 30 साल से अधिक आयु की महिलाओं को 3 साल में पैप स्मीयर और एचपीवी जांच जरूर करवानी चाहिए।
ये होते हैं लक्षण :
- बच्चेदानी से बदबूदार पानी आना, अधिक रक्तस्राव होना।
- बच्चेदानी से अनियमित रक्तस्राव होना।
- मीनोपॉज होने के बाद माहवारी आना। खून के थक्के आना।
- पेशाब में जलन, अपच रहना, पेट के नीचे के हिस्से में दर्द होना।