कासगंज। श्रीमुख से हर हर महादेव के उद्घोष के साथ गंगा स्नान कर नागा संन्यासियों ने तीर्थनगरी से विदाई ले ली। दूर दराज से आए परदेशी संन्यासियों को स्थानीय नागा साधुओं ने सोरों में रमाई धूनी की भभूत दी और अगले साल मेले में आगमन के लिए न्योता दिया। गुरुवार को सभी संन्यासी अपने अपने अखाड़ों के साथ विदा हो गए।
तीर्थनगरी सोरों में हर साल अमृत कुंभ के दौरान मार्गशीर्ष माह में दूर दराज क्षेत्रों के अलावा गैर प्रांतों के अखाड़ों से नागा संन्यासी एकत्रित होते हैं। यहां मार्गशीर्ष माह के त्रयोदशी पर्व पर नागा संन्यासी सभी पंथों के साधुओं के साथ मिलकर स्याही निकालते हैं और स्नान के बाद नागालैंड आश्रम में वाणी की अमृत वर्षा करते हैं।
इसके बाद संन्यासी पूर्णिमा पर्व तक ठहरते हैं और पूर्णिमा पर स्नान कर अपने अपने अखाड़ों के साथ गंतव्य को चले जाते हैं। गुरुवार को नागा साधुओं ने सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगास्नान किया और नागालैंड पहुंचकर अपने-अपने गंतव्य को जाने के लिए विदाई की तैयारी की। स्थानीय नागा साधुओं ने धूनी की भभूत साधुओं को भेंट की। अगले साल के अमृतकुंभ में सहभागिता करने के लिए न्योता दे दिया। जाते हुए संन्यासियों ने विश्व कल्याण की कामना की और तीर्थनगरी के बाशिंदों की खुशहाली की कामना की।
इन अखाड़ों से आए थे साधु
सोरों। हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन सहित अन्य तमाम तीर्थस्थलों के साधु अखाड़ों के साथ तीर्थनगरी पहुंचे थे। पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, सरकार गणपति अखाड़ा बनारस, गणेशगिरी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अग्रि अखाड़ा, पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, खडगदर्शन संप्रदाय, वैष्णव चतुर्थ संप्रदाय सहित विभिन्न अखाड़ों के संन्यासियों ने यहां करतब दिखाया।
स्याही यात्रा में स्वयं की थी पेशवाई
सोरों। आवहान अखाड़ा बरेली के चमनगिरी और उत्तराखंड के दिगंबर अखाड़ा के महंत रामजी त्यागी सहित कई अखाड़ों के महंतों ने स्वयं स्याही यात्रा में पेशवाई कर करतब दिखाए थे। बेहतर करतब दिखाने वाले महंतों का स्थानीय नागा साधुओं ने आभार जताया।
वापस चले गए नागा संन्यासी
- नागा संन्यासी दूरदराज क्षेत्रों से तीर्थनगरी सोरों में स्याही शोभायात्रा को ऐतिहासिक बनाने आए थे। यात्रा के दौरान करतब दिखाकर तीर्थनगरी में आकर्षण का केंद्र बने। उनसे अगले साल आने का फिर अनुरोध किया है- सीताराम दुबे, व्यवस्थापक नागालैंड