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ताजमहल के 'हुस्न' पर चार चांद लगाने वाली मुगलकालीन कला को योगी सरकार देगी बढ़ावा

Wed, 28 Aug 2019 12:07 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल में संगमरमर पर जिस पच्चीकारी को देखकर सैलानी 'वाह! ताज' बोल उठते हैं, वो संगमरमर पर पच्चीकारी एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल होगी। आगरा के लिए लेदर को चुना जा चुका है। 
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अब मुगलिया दौर से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही संगमरमर पर पच्चीकारी को भी इस योजना के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा। आगरा पहला जिला होगा, जहां के दो उत्पाद लेदर और संगमरमर पर पच्चीकारी ओडीओपी योजना में शामिल होंगे।

ताज, एत्माद्दौला, मुसम्मन बुर्ज, शेख सलीम चिश्ती दरगाह में संगमरमर पर पच्चीकारी को उकेरा गया है। मुगलिया काल से ही चली आ रही इस कला को प्रोत्साहन देने के लिए उद्योग विभाग ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इस पर लखनऊ में सहमति बन गई है। 
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हस्तशिल्पियों को होगा फायदा

प्रदेश के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल 30 अगस्त को सर्किट हाउस में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना में संगमरमर पच्चीकारी को शामिल करने के लिए हस्तशिल्प उद्यमियों से चर्चा करेंगे। ओडीओपी में शामिल होने से नि:शुल्क प्रशिक्षण और टूल किट, उत्पादन, मार्केटिंग में सब्सिडी मिलने से हस्तशिल्पियों को फायदा होगा।

जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त शरद टंडन ने बताया कि लेदर के अलावा आगरा में संगमरमर पर पच्चीकारी मुगलिया दौर से ही चली आ रही है। इसे ओडीओपी योजना में शामिल करने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। ओडीओपी से पच्चीकारी को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं यह हुनर भी युवाओं को आकर्षित करेगा। 

आगरा टूरिस्ट वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल ने कहा कि पच्चीकारी एक जिला-एक उत्पाद योजना में शामिल हुई तो कारीगरों को प्रशिक्षण मिलेगा। इसका फायदा युवा कारीगर उठा पाएंगे। सबसे बड़ा फायदा ये है कि यह सरकार की प्राथमिकता में आ जाएगी। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही पच्चीकारी को नई सांसें मिल जाएंगी। 
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