दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल में संगमरमर पर जिस पच्चीकारी को देखकर सैलानी 'वाह! ताज' बोल उठते हैं, वो संगमरमर पर पच्चीकारी एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल होगी। आगरा के लिए लेदर को चुना जा चुका है।
अब मुगलिया दौर से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही संगमरमर पर पच्चीकारी को भी इस योजना के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा। आगरा पहला जिला होगा, जहां के दो उत्पाद लेदर और संगमरमर पर पच्चीकारी ओडीओपी योजना में शामिल होंगे।
ताज, एत्माद्दौला, मुसम्मन बुर्ज, शेख सलीम चिश्ती दरगाह में संगमरमर पर पच्चीकारी को उकेरा गया है। मुगलिया काल से ही चली आ रही इस कला को प्रोत्साहन देने के लिए उद्योग विभाग ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इस पर लखनऊ में सहमति बन गई है।