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यूपी के इन 2 जिलों में चिकन पॉक्स का प्रकोप, 1 की मौत 42 बीमार

Thu, 22 Mar 2018 08:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा/कासगंज
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चिकन पॉक्स से बीमार बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के दो जिलों एटा और कासगंज में चिकन पॉक्स ने कहर मचा दिया। एटा में चिकन पॉक्स की वजह से एक युवक की मौत हो गई। जबकि 34 लोग बीमार हैं। जबकि कासगंज में भी 8 लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। 
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दो दिन पहले एटा के जलेसर विकास खंड के गांव नगला चंदन निवासी देवेंद्र (30) को चिकन पॉक्स की शिकायत पर अवागढ़ के स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया गया। जहां डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद युवक को आगरा रेफर कर दिया। 

आगरा में उपचार के दौरान चंदन की मौत हो गई। चंदन की मौत की सूचना मिलते ही गांव में दहशत फैल गई। इसके बाद गांव में स्वास्थ्य केंद्र अवागढ़ की टीम ने डा. अवधेश कठेरिया के नेतृत्व में शिविर लगाया, मगर शिविर में कोई मरीज नहीं पहुंचा। 
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इस पर टीम ने घर-घर जाकर मरीजों का परीक्षण किया। जिसमें 34 मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई। डाक्टरों की टीम ने मरीजों का उपचार कर दवाएं दीं। लोगों ने बीमारी का प्रकोप देखते हुए घर से निकलना बंद कर दिया है। 

आसपास के गांव में भी बीमारी को लेकर दहशत है। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. अवधेश कठेरिया ने बताया कि सभी मरीजों को उपचार के साथ आवश्यक दवाएं दी गई हैं। मरीजों का पूरा ध्यान रखे जाने की सलाह दी है। 

चिकन पॉक्स की चपेट में आने वाले लोगों में दिव्यांशी, नीरू, रश्मि, लाखन सिंह, ऐल्पेश, स्नेहलता, सूरज, गुड़िया , राधा, मनोज, गौतम, दिलीप, भूरी देवी, हेमा, नीता, ऊषा, निशा, प्रिया, छोटू, राहुल, नितिन, अरविंद, श्याम सिंह, भूपेंद्र, दुर्गपाल, आकाश, विनीता, शिवानी आदि शामिल हैं। 
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यहां भी हैं बीमार

कासगंज के गंजडुंडवारा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम नगला कुडऱी में चिकिन पॉक्स ने अपनी दस्तक दे दी है। बच्चों से लेकर युवा तक इसकी चपेट में आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की इसकी भनक नहीं हैँ। 

यहां गांव में गौरी (7) पुत्र अमर सिंह हरेद्र (18) पुत्र श्यामपाल, राजेश की पुत्री गुडिय़ा (6) व पुत्र जितेंद्र (4) जोगराज (50), प्रदीप (16) पुत्र तेजपाल, प्रवीन (35), दीनदयाल (40 )अदि ग्रामीण चिकिन पॉक्स की चपेट में आ चुके हैं। 

वहीं सूचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम गंाव में नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीण मजबूरन निजी चिकित्सकों के सहारे पीड़ितों का इलाज करने को मजबूर हैं। 
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