धर्मांतरण के पीछे विदेशी ताकतें भी काम कर रही हैं। ईसाई धर्म के प्रचार में लगे कुछ लोगों को विदेशों से वित्तीय मदद मिल रही है। धर्म प्रचार संस्थाओं के नाम पर महंगे भूखंड खरीदे गए। यह चौंकाने वाली जानकारी खुफिया विभाग ने जुटाई है। स्थानीय अभिसूचना ईकाई (एलआईयू) ने अपनी रिपोर्ट में यमुनापार क्षेत्र में रहने वाले एक प्रचारक के आय के स्रोतों की जांच कराने और गतिविधियों पर नजर रखने की संस्तुति भी की है।
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक धर्म प्रचारकने वर्ष 2004 में कालिंदी विहार में किराए पर घर लेकर ईसाई धर्म के प्रचार के लिए संस्था स्थापित की। शुरू में करीब 20 बच्चे इससे जुड़े। वर्ष 2008 में उसने मकान बदला। इसके बाद प्रचारक ने बैकुंठी देवी इंटर कालेज के पास करीब 60 लाख रुपये कीमत की करीब 1000 वर्ग गज भूमि खरीदी। एक अन्य कालोनी में भी 450 वर्ग गज भूमि खरीदी गई जिसकी कीमत वर्तमान बाजार दर से करीब 1.5 करोड़ रुपये है। खुफिया सूचना यह भी है कि प्रचारक को चालू वर्ष में करीब 36 लाख रुपये की वित्तीय मदद विदेश से मिली। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रचारक मलिन बस्तियों में प्रवचन करता है। दुआ से रोग निदान, शिक्षा, आत्मिक शांति आदि बातों से लोगों को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करने का प्रयास करता है। प्रत्येक रविवार को वह अपने आवास पर प्रार्थना सभा करता है जिसमें करीब 100-150 स्त्री-पुरुष शामिल होते हैं। हालांकि ये लोग धर्म परिवर्तन से इनकार कर रहे हैं।
नौकरी छूटी तो बना ईसाई
रिपोर्ट में बताया गया है धर्म प्रचारक आंध्र प्रदेश के हिंदू परिवार से है। एमए, बीएड करने के बाद उसने एक फाइनेंस कंपनी में काम किया। नौकरी छूटने के बाद राजस्थान के एक चर्च से ट्रेेनिंग लेकर पादरी बना और 2004 में आगरा गया।10 वर्षों के अंदर उसने संस्था के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी कर दी।
नगला पद्मा में धर्मांतरण संभव
खुफिया रिपोर्ट में नगला पद्मा के 12 हिंदू परिवारों के धर्मांतरण की आशंका भी जताई गई है। नैनाना जाट क्षेत्र का युवक पादरी है। उसने ही यहां हैंडपंप लगवाया। उसके धन बांटने की भी चर्चा है। उसकी प्रार्थना सभा में तीन गांवों के करीब 20 परिवार ईसाई धर्म में आस्था जता चुके हैं। इनमें से ही 12 के धर्म बदलने की आशंका है।