लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही दावेदारों ने तैयारी शुरू कर दी है। मगर, इस बार नामांकन पत्र भरना आसान नहीं होगा। प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। इसमें जरा सी चूक उनका पर्चा निरस्त करा सकती है। इसलिए यदि प्रत्याशियों को नामांकन पत्र की सभी औपचारिकताएं पहले से ही पूरी करके रखनी होगी। क्योंकि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए दिन भी कम मिलेंगे।
इस बार नामांकन पत्र के प्रारूप 26 (क) में पांच-छह बड़े बदलाव बदलाव किए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत पिछले पांच वर्ष की वार्षिक आय, चल-अचल संपत्ति का विवरण जुटाना होगा। यह एक दिन में मिल पाना मुश्किल है। इसलिए इसके लिए पहले से तैयारी नहीं की तो ऐन वक्त पर अड़चन आ सकती है।
इस बार आगरा, मथुरा और सीकरी के लिए 18 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 19 मार्च से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। पर्चा दाखिल करने की अंतिम तिथि 26 मार्च है। इस बीच 20 और 21 मार्च को होली और 24 मार्च को रविवार की छुट्टी रहेगी। ऐसे में प्रत्याशियों को सिर्फ पांच दिन ही मिलेंगे।
इसलिए उन्हें नामांकन पत्र के साथ संलग्न करने वाले सभी तथ्य पहले से जुटाकर रखने होंगे। मैनपुरी, एटा और फिरोजाबाद के लिए 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 28 मार्च से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। अंतिम तिथि चार अप्रैल है। इसमें भी एक रविवार है। यानी कुल सात दिन मिलेंगे।
ये हैं नामांकन फॉर्म में बड़े बदलाव
- यदि विदेश में अचल संपत्ति है तो उसका विवरण।
- यदि चल संपत्ति है तो कहां, किस बैंक में और कितनी, इसका विवरण।
- स्वयं, पत्नी, आश्रितों की चल-अचल संपत्ति का विवरण।
- स्वयं, पत्नी, आश्रितों की आय का श्रोत।
- पिछले पांच साल का वार्षिक आय का विवरण।
- पैनकार्ड का विवरण। यदि नहीं है तो इसका कारण।
- यदि जीएसटी दी है तो जीएसटी नंबर और बिल का विवरण।
आपराधिक विवरण का देना होगा विज्ञापन
इस बार प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के संबंध में भी नियम में बदलाव किया गया है। पूर्व के चुनावों में सिर्फ फार्म में ही अपने आपराधिक रिकॉर्ड का विवरण देना होता था। मगर, इस बार नामांकन के बाद प्रत्याशी अपना आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के लिए तीन बार विज्ञापन छपवाना होगा। ताकि उस क्षेत्र के मतदाता उक्त प्रत्याशी के बारे में जान सकें।
यदि प्रत्याशी किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का है तो उसे इसकी जानकारी अपनी पार्टी को भी देनी होगी। इस बाबत उसे अपने रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) को पार्टी को जानकारी देने के संबंध में भी शपथ पत्र देना होगा। इन बदले हुए नियमों के उल्लंघन पर पर्चा निरस्त भी हो सकता है।
ये होंगे चेक प्वाइंट
- प्रत्याशी को सत्यापित मतदाता सूची उपलब्ध करानी होगी।
- प्रत्याशी का वोटर कार्ड।
- तहसील, नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत, जलकल, बिजली विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र।
- जमानत धनराशि का चालान।
- फार्म के प्रारूप 26 के सभी कॉलम में विवरण भरना।
- मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रत्याशी को पार्टी का बी फार्म।
- प्रस्तावकों के नाम की सत्यापित मतदाता सूची।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रमेश चंद्र ने बताया कि इस बार नामांकन फार्म में कई बदलाव किए गए हैं। प्रत्याशियों को ध्यानपूर्वक इनका विवरण उपलब्ध कराना होगा। चूक होने पर फार्म निरस्त हो सकता है।
अधिवक्ता रवि चौबे का कहना है कि निर्वाचन आयोग ने इस बार नामांकन फार्म में 5-6 बड़े बदलाव किए हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत पांच साल का वार्षिक आय का विवरण जुटाने में आएगी।