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Agra News: 80 फीसदी दवाओं की कीमत तय कर रहे निर्माता, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

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अ​धिवक्ता केसी जैन 
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आगरा। मरीजों को सस्ती दवाएं मिलें, इसके लिए शहर के अधिवक्ता केसी जैन सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि 80 फीसदी दवाओं की कीमत निर्माता तय कर रहे हैं। इससे इलाज महंगा हो रहा है। उनकी इस दलील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी।
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अधिवक्ता केसी जैन ने बताया क दवा कंपनियों की मनमानी कीमतों से इलाज महंगा हो रहा है। 20 फीसदी दवाएं ही ऐसी हैं, जिन पर सरकार-समिति का नियंत्रण है। खासतौर जरूरतमंद के लिए गंभीर रोगों का इलाज आसान नहीं है। कई बार महंगे इलाज के चलते जरूरतमंद इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं। ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ), 2013 के तहत निर्माता कंपनी गैर-अनुसूचित दवा की कीमत सालाना 10 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ा सकती।
इसके उलट मनमानी कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। इन पर नियंत्रण करने और चिकित्सकों की ओर से जेनेरिक दवाएं लिखना अनिवार्य करने के मकसद से 2023 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हो रही है। इसी चरण में 19 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, एनएमसी और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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