लॉकडाउन में बाहर से लौटे प्रवासी श्रमिकों को घर में रोजगार देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। इसी के चलते अब उद्यान विभाग ने बागबानी के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए योजना शुरू की है। उद्यान विभाग ने श्रमिकों से इसके लिए आवेदन मांगे हैं।
जिले में 18 हजार प्रवासी श्रमिक गैर जनपदों और प्रदेशों से लौटे हैं। इसमें से अब तक सात हजार श्रमिकों को मनरेगा में रोजगार दिलाया जा चुका है। इसके अलावा शैक्षिक आधार पर भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सेवा योजना कार्यालय पहल कर रहा है। इसी कड़ी में अब उद्यान विभाग ने प्रवासी श्रमिकों के लिए मनरेगा के तहत बागबानी की योजना शुरू की है।
इसके तहत प्रवासी श्रमिकों की जमीन पर उद्यान विभाग निशुल्क अमरूद और नीबू के बाग लगाएगा। खास बात ये होगी कि बाग में काम करने पर श्रमिकों को मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान भी किया जाएगा। ऐसे में एक ओर जहां उनका बाग तैयार होगा तो, वहीं उन्हें अपने ही खेत में काम करने की मजदूरी भी मिलेगी।
जिले में विभाग द्वारा अभी 30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 37.44 लाख की धनराशि से इस योजना का संचालन किया जाएगा। उद्यान विभाग ने प्रवासी श्रमिकों से आवेदन मांगे हैं। आवेदन के लिए कलक्ट्रेट स्थित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय संपर्क किया जा सकता है।
इन शर्तों का करना होगा पालन
इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए प्रवासी श्रमिक होने के अलावा भी शासन ने कुछ शर्तें रखी हैं। ये अनिवार्य है कि प्रवासी श्रमिक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग या प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभार्थी हो। इतना ही नहीं परिवार के किसी भी एक सदस्य के पास मनरेगा का जॉबकार्ड होना भी अनिवार्य है।
प्रवासी श्रमिकों के लिए मनरेगा के तहत बागबानी योजना शुरू की गई। नियम व शर्तों को पूरा करने वाले श्रमिक कार्यालय आकर संपर्क कर सकते हैं।
अनीता सिंह, जिला उद्यान अधिकारी।