झेलम एक्सप्रेस की चपेट में आने से रेलवे के अवर अभियंता मनोज सैनी के दोनों पैर कट गए, लेकिन गंभीर हालत में भी उन्होंने साथी रेलकर्मी को फोन कर हादसे की जानकारी दी। उन्हें पहले सैंया सीएचसी और फिर एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां करीब डेढ़ घंटे बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
आगरा में अवर अभियंता मनोज सैनी को जब तक खतरे का आभास हुआ, वह ट्रेन की चपेट में आ गए। दोनों पैर धड़ से अलग होकर कुछ दूर जा गिरे। आंखों के सामने धुंधलका छाने लगा, सांसें उखड़ने लगीं लेकिन मनोज ने हिम्मत नहीं हारी और न ही बेहोश हुए। साथी जेई मुकेश को फोन कर सूचना दी। दौड़ते-भागते पहुंचे अन्य रेल कर्मचारियों ने पुलिस और एंबुलेंस बुलाई।
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आगरा-झांसी रेलवे लाइन पर मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे हादसा होते ही चीख-पुकार मच गई। घायल मनोज को पहले सीएचसी सैंया ले जाया गया। उनकी हालत बेहद गंभीर थी। सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें रेफर कर दिया। पुलिस की मदद से रेलवे कर्मचारी उन्हें लेकर आगरा पहुंचे। एसएन मेडिकल कॉलेज में शाम करीब 7 बजे उनकी सांसों की डोर टूट गई।
मनोज सैनी रेलवे के एफएमआई विभाग में अवर अभियंता के पद पर तैनात थे। वह मूल रूप से चंदौसी के रहने वाले थे। बुधवार शाम जाजऊ रेलवे स्टेशन के पास ब्लॉक लेकर मशीन से नीचे उतरे ही थे कि भाड़ई की ओर से आ रही झेलम एक्सप्रेस ने उन्हें चपेट में ले लिया। हादसे के बाद वह कुछ देर तक ट्रैक किनारे पड़े रहे। सूचना पर पहुंची एंबुलेंस से उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
हादसा देख कांप गई लोगों की रूह
घटनास्थल पर मौजूद संतोष ने बताया कि शाम करीब 5:30 बजे डाउन ट्रैक पर झेलम एक्सप्रेस के गुजरने पर लोगों को हादसे की जानकारी हुई। पटरी के पास ही कपड़ों की फेरी लगाने वाली महिला रुखसाना जेई के कटे पैर देख खुद को संभाल नहीं सकी। वह रोते हुए वहीं बैठ गई। अन्य लोगों की भी रूह कांप उठी। बाद में पुलिस स्थानीय लोगों की मदद से मनोज सैनी को उठाकर एंबुलेंस तक ले गई।
आगरा मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि जेई मनोज सैनी जाजऊ में ट्रैक पर काम कर रहे थे। शाम 5:30 बजे काम समाप्त होने के बाद वहां से गुजर रही झेलम एक्सप्रेस की चपेट में आ गए और उनके दोनों पैर कट गए। उपचार के दौरान मौत हो गई। विस्तृत जांच जारी है।
दोस्त के दर्द भरे शब्द सुन दौड़े मुकेश
मनोज के साथी जेई मुकेश की जाजऊ स्टेशन पर तैनाती है। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद घायल अवस्था में कराहते हुए जब मनोज ने फोन किया तो वह तुरंत दौड़ पड़े। मौके पर पहुंचे तो मनोज गिट्टियों पर पड़े थे और आसपास भीड़ लग गई थी। उनकी आंखें खुली थीं, जैसे सभी से जान बचाने की गुहार लगा रही हों।