मैनपुरी। तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी मनीष यादव को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जेल में उसकी पहली रात बेचैनी में गुजरी। उसने किसी बंदी और बंदी रक्षक से बात तक नहीं की। उसकी कड़ी निगरानी के लिए विशेष रूप से दो बंदी रक्षकों को बैरक के बाहर तैनात किया गया है।
तिहरे हत्याकांड को अपने दो रिश्तेदारों की मदद से अंजाम देने वाले मनीष यादव निवासी जलालपुर, थाना करहल को शुक्रवार को फास्ट ट्रेक कोर्ट (द्वितीय) जज तुरन्नुम खान ने फांसी की सजा सुनाई थी। मनीष ने एक अक्तूबर 2012 को पिता सुखराम, सौतेली मां सुषमा और सौतेले भाई अभिषेक की हत्या कर दी थी। हत्याकांड को अंजाम देने में मनीष के रिश्तेदार वीरेंद्र यादव तथा कमलेश थी शामिल थे। फांसी की सजा होने के बाद मनीष को मैनपुरी जेल, वीरेंद्र को कन्नौज जेल, कमलेश को इटावा जेल भेजा गया।
मनीष को फांसी की सजा के बाद जब पुलिस जेल लेकर पहुंची तो वह गुमसुम रहा। जेल के प्रवेश द्वार पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसको विशेष बैरक में रखा गया। फांसी की सजा होने के कारण विशेष बैरक की सुरक्षा बढ़ा दी गई। बैरक के बाहर दो बंदी रक्षकों की स्थायी रूप से ड्यूटी लगाई गई। जेल में पहुंचने के बाद मनीष ने किसी से कोई बात नहीं की। वह बैरक में काफी देर तक टहलता रहा। बाद में अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया। शनिवार की सुबह भी उसने किसी से कोई बात नहीं की।
मनीष यादव को फांसी की सजा होने के कारण विशेष बैरक में रखा गया है। उसकी कड़ी निगरानी के लिए बैरक के बाहर दो बंदी रक्षक स्थायी रूप से तैनात किए गए हैं। जो उसकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं।
पीके त्रिवेदी, जेलर, जिला जेल