आगरा के सर्वोदयी नेता चंद्रभान गोयल की हत्या का आरोपी कोर्ट से बरी हो गया। पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे की जो कहानी बनाई थी, वह कोर्ट में साबित नहीं हो पाई। गोयल की हत्या उनकी दुकान के बाहर बरामदे में ईंट से सिर कुचलकर की गई थी।
समाजसेवी चंद्रभान गोयल (85) मूल रूप से खेरागढ़ के रहने वाले थे। 1977 में जेपी आंदोलन को जिले में धार दी थी,
उन्हें जेल भेजा गया था। लगभग डेढ़ साल जेल में रहे। धूलियागंज में उनकी किताबों की दुकान थी। 29 अक्तूबर 2014 को दुकान बंद कर इसके बरामदे में सो रहे थे। वहीं पर उनकी हत्या की गई थी। चंद्रभान के सिर को ईंट से कुचल दिया गया था। तड़के कोई उधर से गुजरा तो उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया। वहां उनकी मृत्यु हो गई थी, उनके बेटे विनोद अग्रवाल ने घटना की रिपोर्ट अज्ञात में दर्ज कराई थी।
पुलिस ने खुलासा किया था कि बरहन के टेहू के मूल निवासी धर्मेंद्र ने यह वारदात की। उस समय वह हरीपर्वत के नगला महादेव में रह रहा था। कोर्ट में सात गवाह पेश किए गए, लेकिन कोई चश्मदीद नहीं था । आरोपी की पैरवी अधिवक्ता विजय आहूजा एवं साजिद ए कुरैशी ने की।
गुस्से में बंद रहा था बाजार
इस घटना से शहर के कारोबारी गुस्से में थे। धूलियागंज बाजार को बंद रखा गया था। पुलिस पर खुलासे का दबाव था। पुलिस घटना की कोई ठोस वजह पेश नहीं कर पाई थी।