पार्षद ने जानकारी की तो पता चला कि डूडा ने ऐसा कोई कैंप लगाया ही नहीं है। पार्षद अर्पित सारस्वत जब कैंप में पहुंचे तो वह सरकारी योजनाओं के फॉर्म 200 रुपये लेकर भर रहा था। वह खुद को नगर निगम का अधिकारी बता रहा था। ऐसे में थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया।
पार्षद अर्पित सारस्वत ने कहा कि जिन बस्तियों में अशिक्षित लोग हैं और सरकारी योजनाओं का फायदा लेना चाहते हैं। इस तरह के फर्जी कैंप लगाकर वसूली की शिकायतें आ रही हैं। मेरी लोगों से भी अपील है कि ऐसी कोई भी सूचना मिले तो पार्षदों को जरूर सूचित करें।
मेयर नवीन जैन ने कहा कि डूडा और सूडा के अधिकारी सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार नहीं कर रहे हैं। इसीलिए इस तरह के फर्जी कैंप लगाकर लोग अवैध वसूली में जुटे हैं। मैं मुख्यमंत्री से डूडा के अधिकारियों की शिकायत करूंगा। उनकी कार्यप्रणाली के कारण लोग फर्जी आवेदन के जाल में फंस रहे हैं।
डूडा के परियोजना निदेशक संजय पथरिया ने कहा कि इस कैंप की मुझे कोई जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जी काम करने वालों के खिलाफ हमने 8 मुकदमे दर्ज कराए हैं। इस मामले में मेरी अपील है कि लोग ऑफिस आकर ही फॉर्म भरें। किसी के झांसे में ना आएं।