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अब युद्ध में पैराशूट से पहुंच सकेगा सात टन का साजो-सामान, तैयार हुआ स्वदेशी पी-7 ड्रॉप सिस्टम, जानें इसकी विशेषता

Thu, 16 Jul 2020 10:51 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • डीआरडीओ ने पूरी तरह स्वदेशी पी-7 हैवी ड्रॉप सिस्टम किया तैयार
  • आगरा में मलपुरा के पैरा ड्रॉपिंग ग्राउंड पर किया गया ट्रॉयल
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स्वदेशी पी-7 हैवी ड्रॉप सिस्टम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रक्षा निर्माण में मेक इन इंडिया के तहत देश ने बड़ी कामयाबी पाई है। डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ऑर्गैनाइज़ेशन) के द्वारा विकसित पी-7 हैवी ड्रॉप सिस्टम की मदद से अब युद्ध के मैदान में सात टन तक वजनी साजो सामान को पैराशूट के जरिए आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
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बड़ी संख्या में उत्पादन से पहले अनिवार्य स्वीकृति (बीपीसी) के लिए बुधवार को भारतीय सेना, वायुसेना और एडीआरडीई की संयुक्त टीम ने आगरा के मलपुरा स्थित पैरा ड्रॉपिंग जोन में दो सिस्टम का सफल परीक्षण किया।

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इसमें आईएल-76 विमान से दो पी-7 हैवी ड्रॉप सिस्टम को 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे विमान से 600 मीटर की ऊंचाई से नीचे छोड़ा गया।
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डीआरडीओ की सहयोगी इकाई एडीआरडीई के आगरा के निदेशक अरुण सक्सेना ने बताया कि पांच विशालकाय पैराशूट के जरिए पूरा साजो सामान सुरक्षित जमीन पर पहुंचा।

यह पी -7 हैवी ड्रॉप सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है और आईएल 76 विमानों की मदद से सैन्य उपकरणों को लाने ले जाने में सक्षम है। इसके पहले भी ट्रायल हो चुके हैं। पी-7 हैवी ड्रॉप सिस्टम का निर्माण कंपनी एलएंडटी कर रहा है जबकि इसके लिए पैराशूट निर्माण ऑर्डनेंस फैक्टरी कर रही है।

पैराशूट पर तेल और पानी का असर नहीं होगा
तैयार पैराशूट पर तेल व पानी का कोई असर नहीं है और इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल भी किया जा सकता है। पांच सालों से चल रही टेस्टिंग

डीआरडीओ काफी लंबे समय से इस सिस्टम को बनाने की तैारी कर रहा था। पिछले करीब 5 सालों से  हैवी ड्रॉप सिस्टम की टेस्टिंग जारी है।
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