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ऐसे मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व

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14एमएनपी-32-एसबीआरएल एकेडमी में लोहड़ी पर आयोजित कार्यक्रम में नृत्य करती छात्राएं - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। मकर संक्रांति बुधवार को मनाई जाएगी। इसको लेकर मंगलवार को खरीदारी होती रही। गजक, तिल और गुड़ के साथ पतंग खरीदी गईं। खिचड़ी भोज का आयोजन भी किया जाएगा।
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हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह में जब सूर्य मकर राशि में आता है तब ये पर्व मनाया जाता है। पुरानी परंपरा और कलेंडर के अनुसार जनवरी के चौदहवें या पंद्रहवें दिन यह पर्व आता है। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जा रही है। जानकार बताते हैं कि मकर संक्रांति से ही सूर्य धनु रशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारंभ होती है। देश के कई स्थानों पर इस पर्व को उत्तरायणी के नाम से भी जाना जाता है। मंगलवार को ही तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। हालांकि कुछ स्थानों पर मंगलवार को भी मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। मंगलवार देर शाम पैसेंजर ट्रेन से सैकड़ों लोग गंगा स्नान के लिए फर्रुखाबाद को रवाना हुए।
पूजा विधि
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। या फिर घर पर ही सुबह स्नान कर पूजा की जाती है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की जाती है। इसी के साथ मकर संक्रांति के दिन पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण दिया जाता है।
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7:15 से शुरू होगा पुण्य कार्य
आचार्य रामानंदन शास्त्री बताते हैं कि 15 जनवरी को सुबह 7:15 बजे से स्नान ध्यान व दान पुण्य का कार्य शुरू किया जाएगा। 12:30 बजे तक पुण्य काल चलेगा। जिसकी अवधि कुल पांच घंटे 15 मिनट है। उन्होंने बताया कि महापुण्य काल का समय 7:15 बजे से 9:15 बजे तक है। जिसकी अवधि कुल दो घंटे है।
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