मैनपुरी। शहर के सतीश नर्सिंग होम के संचालक डॉ. अभिषेक गुप्ता के खिलाफ जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में केस दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार ग्राम केलनपुर, पोस्ट खरपरी, कोतवाली ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी पूनम की मृत्यु पथरी के ऑपरेशन में की गई लापरवाही के कारण हुई है, और उन्होंने 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है। अस्पताल और डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण उपभोक्ता फोरम ने अब एकपक्षीय सुनवाई का आदेश दिया है।
प्रवीण कुमार ने दायर याचिका में बताया कि 6 अगस्त 2024 को पत्नी पूनम के पेट में दर्द हुआ, जिसके बाद वे उसे सतीश नर्सिंग होम लेकर गए। वहां डॉ. अभिषेक गुप्ता ने पूनम को देखा और अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पूनम की पित्त की थैली में पथरी बताई गई। 18 अगस्त 2024 को वे दोबारा सतीश नर्सिंग होम गए।
डॉ. अभिषेक गुप्ता ने पूनम का दूरबीन द्वारा ऑपरेशन करने को कहा और आयुष्मान कार्ड होने पर कोई खर्चा न आने का आश्वासन दिया। प्रवीण कुमार 12 अगस्त 2024 को ऑपरेशन के लिए तैयार हो गए। हालांकि, बाद में डॉ. अभिषेक गुप्ता बाहर आए और बताया कि चीरा लगाकर ऑपरेशन करना पड़ेगा। डॉक्टर द्वारा आश्वस्त किए जाने पर वह चीरा वाले ऑपरेशन के लिए सहमत हो गए।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत और मौत
ऑपरेशन के दौरान पूनम के पेट में नली लगाई गई जिससे पस (मवाद) आ रहा था। ऑपरेशन के बाद भी उन्हें पेट में दर्द की शिकायत रही। डॉ. अभिषेक गुप्ता ने 13 दिन तक पूनम को अस्पताल में रखा, जिससे मानसिक और आर्थिक परेशानी हुई। घर आने पर भी पूनम के पेट से पस आना बंद नहीं हुआ, और उन्हें उल्टियां होने लगीं। 2 सितंबर 2024 को प्रवीण ने दोबारा डॉ. अभिषेक गुप्ता से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इलाज करने से मना कर दिया। 3 सितंबर 2024 को पत्नी को आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां एमआरआई और एमआरसीटी जांच में डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान पूनम की पित्त की नली कट गई थी, जिस कारण पस आना बंद नहीं हो रहा था। आगरा के बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर में भर्ती कराया गया। कुछ दिन इलाज के बाद 5 दिसंबर 2024 को वहां से भी डिस्चार्ज कर दिया गया। 18 अक्टूबर 2024 को उनकी मृत्यु हो गई।
एसपी से भी शिकायत की। मगर, कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में सीजेएम कोर्ट के आदेश पर शहर कोतवाली में केस दर्ज हुआ। प्रवीण के अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कटारिया ने इस मामले में प्रवीण के पक्ष में 50 लाख रुपये की आर्थिक, शारीरिक और मानसिक क्षति की मांग की है। इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम में अस्पताल की ओर से कोई जवाब नहीं दाखिल किया गया। इस पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष ब्रजभूषण पांडे और सदस्य नीतिका दास ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एकपक्षीय सुनवाई का आदेश दिया है। अ8 अगस्त 2025 को प्रवीण कुमार की गवाही दर्ज की जाएगी।