मैनपुरी। जिले में केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लखपति दीदी योजना ने महिलाओं को सशक्त बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2024-25 का प्रशासन ने रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक जिले में अब तक 18,850 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इनकी वार्षिक पारिवारिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो गई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के परियोजना निदेशक शौकत अली के अनुसार लखपति दीदी योजना का संचालन वर्ष 2024 से शुरू हुआ था। इस योजना का मुख्य लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। जिले की 18,850 महिलाओं के परिवारों की कुल शुद्ध वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।
यह है लखपति दीदी योजना
यह योजना महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह के लाभ प्रदान करती है। योजना के तहत महिलाओं को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हो सकें। इसके बाद रोजगार स्थापित करने के लिए इन महिलाओं को 1 से 5 लाख तक का ऋण दिया जाता है, जिस पर कोई ब्याज नहीं लगता। महिलाओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं के लिए बाजार तक पहुंच और मार्केटिंग में भी सहायता प्रदान की जाती है।
इस गणना के आधार पर माना जाता है लखपति दीदी
स्वयं सहायता समूह की ऐसी सदस्य को लखपति दीदी माना जाता है, जिनकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख या उससे अधिक हो। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है, जिनकी औसत मासिक आय 10 हजार या इससे अधिक बनी रहती है। उन्हें लखपति दीदी माना जाता है।