मैनपुरी। शहर के स्टेशन रोड पर शुक्रवार की रात को बस ट्रैवल एजेंसी संचालकों में दिल्ली रूट पर बस संचालन के संबंध में हुई वर्चस्व की लड़ाई ने इनकी कमियों की परतों को भी खोलना शुरू कर दिया है। मानकों को ताक पर रख सवारियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार को भी लाखों रुपये की जीएसटी चोरी कर चूना लगाया जा रहा है। मगर, जिम्मेदार अधिकारी खामोश बैठे रहते हैं। इस अवैध खेल के संचालन के पीछे एक नहीं, बल्कि कई सरकारी महकमे जिम्मेदार हैं।
जिले में ठेका यानी कंट्रेट कैरेज के लाइसेंस परिवहन विभाग से जारी हैं। एक भी एजेंट लाइसेंस जारी नहीं है। कंट्रेट कैरेज के लाइसेंस धारकों को सिर्फ बुकिंग पर गाड़ी एक तय स्थल से दूसरे तय तक सवारियों के एक समूह को परिवहन कराने की अनुमति होती है। इस लाइसेंस के तहत फुटकर सवारियों का परिवहन या टिकट काटने की अनुमति नहीं होती है। मगर, जिले में बस ट्रैवल एजेंसी संचालक यह अवैध खेल खुलकर खेल रहे हैं। दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव, जयपुर आदि रूटों पर निजी बसों का संचालन किया जा रहा है। ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस के बाहर ही अवैध रूप से प्रति सवारी टिकट काटी जाती हैं। मगर, जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।
सांठगांठ के सहारे चल रहा है पूरा खेल
मैनपुरी से निजी बसों का संचालन विभिन्न रूटों पर किया जा रहा है। अवैध रूप से इनका संचालन हो रहा है। पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, जीएसटी, परिवहन, प्रशासन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी इस खेल को संरक्षण दे रहे हैं।
जंगलराज है कायम, पुलिस भी नहीं देती ध्यान
स्टेशन रोड पर रात नौ बजे के बाद बीच सड़क पर अवैध रूप से बसों को खड़ा कर सवारियों का बैठाया जाता है। जंगलराज यहां कायम हो जाता है। आसपास के दुकानदार बसों को अपनी दुकान के आगे खड़ा करने से रोकते हैं तो उनको पीट दिया जाता है। यहां तक की बस में बैठने वाली सवारी भी अगर किसी असुविधा के बारे में कहती है तो सवारी के साथ ही अभद्रता कर दी जाती है। पुलिस यहां कभी कार्रवाई नहीं करती। जबकि पिछले हफ्ते एसपी स्टेशन रोड से रात के समय गुजरते वक्त पूरा नजारा देखने के बाद अपने अधीनस्थों को कार्रवाई के आदेश भी दे चुके हैं।
जीएसटी टीम भी नहीं देती है ध्यान
जीएसटी की लाखों रुपये की चोरी हर माह हो रही है। इसके बाद भी जीएसटी टीम कभी इन टैक्स चोरों पर कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाती है। इसको लेकर कई बार जीएसटी के अधिकारियों पर भी सवाल खड़े हुए हैं। कुछ एक को छोड़ दे तों अधिकांश ट्रैवल एजेंसी संचालकों के पास जीएसटी का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है।
नगर पालिका भी नहीं करती कार्रवाई
ट्रैवल एजेंसी संचालकों ने नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र वाली स्टेशन रोड पर अपने बोर्ड, होर्डिंग आदि लगवा रखे हैं। नगर पालिका के जिम्मेदार भी इस ओर ध्यान नहीं देते है।
अधिकारी सो रहे हैं, खुद हो जाएं जागरूक
वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष पांडेय ने बताया कि अधिकृत एजेंट लाइसेंस प्राप्त करने के बाद ही बसों का संचालन फुटकर सवारियों के परिवहन में किया जा सकता है। इनमें सफर करने वाले लोगों को भी सहूलियत मिलती है। अगर, सफर के दौरान किसी प्रकार का हादसा होता है तो सरकार मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देती है। मगर, ठेका लाइसेंस पर अनाधिकृत रूप से फुटकर सवारी परिवहन के दौरान हादसा होने पर यह सहूलियत नहीं मिलती। जनता नियमों की जानकारी करे। वैध बसों में ही परिवहन करें।
नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से बसों का संचालन और सवारियों की जान को खतरे में डालना व जीएसटी की चोरी करना गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। अवैध रूप से फुटकर सवारियों का परिवहन करने वाले बस संचालकों की बसों को सीज कराया जाएगा।
- अंजनी कुमार सिंह, डीएम