तारकशी कला से शीशम की लकड़ी पर पीतल के तारों से आकृति बनाते कारीगर नेमीचंद शाक्य।
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मैनपुरी। सदियों पुरानी शिल्पकला ''तारकशी'' को आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने जा रहा है। इस कला को दशकों से जीवित रखने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले कारीगर नेमीचंद शाक्य को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ''पद्मश्री'' के लिए नामित किया गया है। जिला प्रशासन ने नेमीचंद के नाम का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है। शहर के देवपुरा इलाके के रहने वाले नेमीचंद शाक्य का परिवार इस कला से कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है। उनके दादा लालता प्रसाद शाक्य ने शौकिया तौर पर यह कला सीखी थी। परिवार के सदस्यों को उनकी कला के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उनके पिता राम स्वरूप शाक्य को 1970 में राष्ट्रपति वीवी गिरी के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार और 2005 में शिल्पगुरू अवॉर्ड से सम्मानित किया। नेमीचंद शाक्य को खुद 1997 में राज्य पुरस्कार, 2005 में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से राष्ट्रीय पुरस्कार, और 2012 में कलाश्री अवॉर्ड मिल चुका है। उनके भाई राजकुमार शाक्य, पत्नी नीलम देवी, और भाभी रेखा देवी तथा किरन देवी भी राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार जीत चुकी हैं।
इस प्रकार बनाई जाती है तारकशी से आकृति
नेमीचंद बताते हैं कि तारकशी एक बेहद बारीक और खूबसूरत कला है, जिसमें शीशम की लकड़ी पर पीतल के तारों से नक्काशी की जाती है। यह काम बहुत मेहनत और धैर्य मांगता है। सबसे पहले लकड़ी पर मनचाहा डिजाइन चिपकाते हैं, फिर छेनी और हथौड़े की मदद से उस पर खुदाई करते हैं। इसके बाद पीतल की शीट से पतले-पतले तार निकालकर उन्हें इन खांचों में सावधानी से बैठाया जाता है। अंत में एक पत्थर की सिल्लियों से घिसाई करके तारों को लकड़ी के बराबर किया जाता है, जिससे सतह चिकनी और आकर्षक बन जाती है। नेमीचंद ने इस कला को देश-विदेश में पहुंचाया है। वह न्यूयॉर्क, जर्मनी, साउथ अफ्रीका और थाईलैंड जैसे कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने दो सौ से अधिक लोगों को यह कला सिखाई है। उनकी बनाई हुई ''''कृष्ण-अर्जुन के गीता का संदेश'''' की आकृति ने काफी वाहवाही बटोरी थी।
सरकार की पहल और जीआई टैग से मिली पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तारकशी को ''एक जनपद एक उत्पाद'' (ओडीओपी) के रूप में चुना था, जिससे इसे एक नई पहचान मिली है। मई 2023 में मैनपुरी की तारकशी को भौगोलिक संकेत (जीआई टैग) मिला, जिससे इसकी प्रामाणिकता और विशिष्टता स्थापित हुई। ओडीओपी योजना के तहत कारीगरों को वित्तीय सहायता, मार्जिन मनी और टूलकिट ट्रेनिंग जिला उद्योग केंद्र की ओर से दी जा रही है। उत्पादों को गंगोत्री शोरूम, ओडीओपी गैलरी, ओडीओपी मार्ट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे फ्लिपकार्ट व अमेजन पर बेचा जा रहा है। बेवर ब्लॉक में एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर भी खोला गया है।
अगर पद्मश्री मिलता है तो यह सम्मान सिर्फ नेमीचंद शाक्य का नहीं, बल्कि मैनपुरी की सदियों पुरानी कला और उससे जुड़े हर कारीगर का सम्मान होगा।
- अंजनी कुमार सिंह, डीएम