राजस्व संहिता की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन एवं शासन के अपर महाधिवक्ता राजबहादुर सिंह यादव ने कहा कि किसानों को अपने दरवाजे पर न्याय दिलाने के लिए प्रत्येक गांव में अब राजस्व समिति का गठन किया जाएगा। इसमें प्रधान अध्यक्ष और लेखपाल सचिव होंगे। इसके अलावा भी चार सदस्य होंगे।
यह जानकारी उन्होंने सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने राजस्व संहिता 2006 की त्रुटियां दूर करने और आवश्यक संशोधन के लिए उनकी अध्यक्षता में ड्राफ्टिंग कमेटी का गठित की थी। कमेटी ने 21 जुलाई को 40 मूल संशोधन और 149 त्रुटियों वाले संशोधन किए। इसमें पहला संशोधन किया कि अनुसूचित जाति का कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन के हिस्से को किसी भी व्यक्ति को बेच सकेगा। बशर्ते उस पर 3.125 एकड़ से कम जमीन नहीं रह जाए। इसमें जिलाधिकारी भी यह देखेंगे की जमीन सही दाम में बिके। इसके लिए जमीन मालिक को एक परफॉर्मा भरना होगा, जिस पर जिलाधिकारी और एसडीएम 15-15 दिन में जांच करके निर्णय लेंगे। इसके अलावा गांव में राजस्व समिति का गठन संबंधी संशोधन किया गया। समिति भूमि संबंधी विवाद के निपटारे में अहम भूमिका निभाएगी। सदस्य पंचायत के माध्यम से विवादों के निपटारे की कोशिश करेंगे। समिति की निगरानी प्रशासनिक अधिकारी करेंगे। अगर, कोई व्यक्ति समिति के निर्णय से असंतुष्ट होगा तो उसके लिए कोर्ट के दरवाजे खुले हैं। इन सुझावों को सरकार ने स्वीकार कर लिए हैं। इसके अलावा 50 हजार से कम कर्ज वाले किसानों को गिरफ्तारी से छूट का अधिकार, पूरे प्रदेश में गांवों में सीमांकन चिह्न लगाने की व्यवस्था की गई है। इसे 11 फरवरी 2016 को लागू होगा।