सनातन धर्म में महाशिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के शुभ विवाह को संपन्न करके, विधिवत पूजा-अर्चना, अभिषेक व्रत एवं उपासना करके श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है।
भगवान शिव जी के मस्तक पर चंद्रमा मन का, पूर्ण ज्ञान का, और प्रफुल्ल अवस्था का प्रतीक है। भगवान शिव जी के सिर से गंगा की जलधारा से आशय ज्ञान गंगा से है, भगवान शिव जी के वाहन वृषभ नंदी शक्ति का प्रतीक है। आपके मस्तक पर चंद्रमा मन का, पूर्ण ज्ञान का, और प्रफुल्ल अवस्था का प्रतीक है। भगवान शिव जी के सिर से गंगा की जलधारा से आशय ज्ञान गंगा से है, गंगा जी ज्ञान की प्रचंड आध्यात्मिक शक्ति के रूप में संपूर्ण विश्व में ज्ञान को प्रवाहित कर रही हैं।
शुभ योगों का हो रहा निर्माण
भगवान शिव जी का डमरू विजय का प्रतीक है उसके हर शब्द में सत्यम शिवम और सुंदरम की ध्वनि ही प्रवाहित होती है। त्रिशूल धारण करने से तात्पर्य है लोभ, मोह और अहं तीनों के बंधन को नष्ट करके, ज्ञान, भक्ति और कर्म की शक्ति प्रदान करते हैं। इस बार महाशिवरात्रि पर अनेक शुभ योगों कर का निर्माण हो रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात काल 7:17 से लेकर 19:48 तक, अमृत योग, बुद्धादित्य योग, शिवराज योग, श्री लक्ष्मी नारायण योग बन रहे हैं, इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र, सूर्य कुंभ राशि में तथा चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र, सूर्य कुंभ राशि में तथा चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे।
ये हैं पूजन के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त:-प्रातः काल 5:21 से लेकर 6:15 तक
अभिजीत मुहूर्त:-दोपहर 12 15 से लेकर 12:59 तक