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महाशिवरात्रि: 48 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग

Mon, 16 Feb 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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वर्ष 1967 के बाद इस बार महाशिवरात्रि पर ग्रहों का दुलर्भ योग बन रहा है। इस दिन शुक्र और गुरु उच्च राशि में रहेंगे। बुध चंद्र की युति मकर राशि में रहेगी। मंगल मित्र राशि मीन में रहेगा। यह योग सभी राशियों के लिए शुभ फलदायी माना जा रहा है। बटेश्वर में महाशिवरात्रि पर चारों पहर जागरण होगा। शिव का गंगाजल से अभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंचेंगे।
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ज्योतिषाचार्य शिवशरण पारासर ने बताया कि 1967 में शिवरात्रि पर गुरु और शुक्र उच्च राशि में थे। 48 साल बाद एक बार फिर दोनों ग्रह शिवरात्रि के मौके पर 17 फरवरी को उच्च राशि में होंगे। यह योग सभी राशियों के लिए शुभ फलदायी साबित होगा। राशि के अनुसार शिव का पूजन करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर मेष राशि वाले आक का पुष्प शिव को अर्पित करें। वृषभ राशि वाले जल मिश्रित दूध शिवलिंग पर चढ़ाएं। मिथुन राशि वाले तीन वेलपत्र चढ़ाएं। कर्क राशि वाले चंदन से पूजन करें। सिंह राशि वाले शाम को शिव के समक्ष घी का दीपक जलाएं। कन्या राशि वाले बेलपत्र चढ़ाएं। तुला राशि वाले शिव को माखन मिश्री भोग लगाएं। वृश्चिक राशि वाले कच्चा दूध चढ़ाएं। धनु राशि वाले बेलपत्र और पुष्प चढ़ाएं। मकर राशि वाले सफेद पुष्प चढ़ाएं। कुंभ राशि वाले केसर युक्त दूध अर्पित करें। मीन राशि वाले चावल और चंदन चढ़ाएं तो शिव प्रसन्न होंगे।
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महाशिवरात्रि पर बटेश्वर में चारों पहर भगवान शिव का जागरण होगा। इसमें शामिल होने और शिव का अभिषेक करने वालों के मनोरथ पूरे होते है। उनके पापों का क्षय होता है। इस दिन बटेश्वर में बड़ी संख्या में भक्त कांवर चढ़ाने आएंगे।
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                                    - जयप्रकाश गोस्वामी, पुजारी मंदिर ब्रह्मलाल, बटेश्वर
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