प्रत्येक कट्टे पर 200 से 300 रुपये तक का फायदा
निरीक्षक के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि कालाबाजारी एजेंटों के माध्यम से करते थे। गोदाम पर नकली डीएपी तैयार करने के साथ ही आसपास के जिलों और राजस्थान के एजेंटों को फोन करके बुला लेते थे। वो कुछ ही घंटों में माल लेकर चले जाते थे।
एजेंट गांवों में किसानों से संपर्क करते थे। कहते थे कि एक रैक आई थी। इसमें से कट्टे लेकर आए हैं। सरकारी कीमत से कम दाम पर दी जा रही है। अगर, वो लोग समितियों पर जाएंगे तो उन्हें यह मुश्किल से मिल पाएगी। वह उनके खेत तक लेकर आ रहे हैं। इससे किसान झांसे में आ जाते थे। एजेंट को प्रत्येक कट्टे पर 200 से 300 रुपये तक का फायदा हो जाता था।
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